आम चुनाव की
तारीख नजदीक आने के साथ-साथ यूपीए सरकार ने तेजी से चुनावी दांव चलने शुरू
कर दिए हैं। सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की तैयारी कर ली
है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे।
रघुराम
राजन कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार, एमपी, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश
सहित सात राज्य सबसे कम विकसित राज्य हैं। प्रधानमंत्री ने सिफारिश की है
कि इस रिपोर्ट के आधार पर जरूरी कदम लिए जाएं। इसी आधार पर बिहार को विशेष
राज्य का दर्जा दिया जा सकता है।
सरकार
के इस कदम को JDU को लुभाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
जानकारों के मुताबिक जेडीयू पहले ही एनडीए से अलग हो चुकी है और कांग्रेस
के लिए अपने लिए मौका दिख रहा है। जाहिर है इस फैसले से यूपीए और एक और
साथी मिल सकता है।
यूपीए
सरकार ने कल ही सातवें वेतन आयोग के गठन का ऐलान किया था। इससे करीब 80
लाख केंद्रीय कर्मचारियों को फायदा होगा। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसले
को पलटकर दागी सांसदों पर अध्यादेश के कदम को भी सरकार की चुनावी कसरत के
तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि इसका सीधा फायदा लालू प्रसाद यादव को हो
सकता है। चारा घोटाले में आरोपी लालू प्रसाद पर 30 सितंबर को कोर्ट का
फैसला आऩा है।
