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दीपावली : लौट रहे लोग शास्त्रीय पूजा की तरफ


नवगछिया के प्रख्यात ज्योतिष आचार्य पंडित शिव शंकर ठाकुर  ने दीपावली के मौके पर कहा कि अब अति व्यस्त घरों में भी लोग ज्ञाता आचार्यो से संपर्क कर षोडसोपचार पूजा करने पर विश्वास रखते हैं। अब पूजा में हाइटेक सिस्टम पसंद नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि
लक्ष्मी कर्म प्रधान देवी है इसलिए उन्हीं पर प्रसन्न होती हैं, जो अपने लक्ष्य पर अडिग रहते हैं। इसलिए वे कर्म और भक्ति दोनों के संतुलन में पूर्ण समर्पण करने वाले लोगों पर कृपा करती हैं।
ऐसे करें लक्ष्मी जी को प्रसन्न
पूजा स्थल पर भगवान विष्णु, लक्ष्मी और गणेश की स्थापना करें। इसके साथ लक्ष्मी जी के भाई कुबेर हैं और धन के स्वामी भी हैं। इसी प्रकार इंद्र ऐश्वर्य के स्वामी हैं। इस प्रकार लक्ष्मी जी के पूरे परिवार सहित पूजा अर्चना करनी चाहिए।
भोग लगाने की सामग्री
फलों में भगवान विष्णु को केला, लक्ष्मी जी को शरीफा व अनार व इंद्र को ईख, कुबेर को कमलगट्टा अर्पित किया जाए। गणेश जी को पान व लड्डू चढ़ाना चाहिए। मिठाइयों में लक्ष्मी जी को नारियल की बनी मिठाई व खीर, कुबेर को लड्डू चढ़ाना चाहिए। अलावा पंच मेवा, मौसमी फल होना चाहिए।
पूजा के दौरान स्तुति भगवान विष्णु, लक्ष्मी एवं गणेश जी की होनी चाहिए। श्री सुक्त व कनक धारा का पाठ लक्ष्मी जी की पूजा में, श्री विष्णु पंजर स्तोत्र व गणेश स्तुति की जानी चाहिए।
पूजा का मुहूर्त
शाम 5 बजकर 24 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट तक मिथुन व कर्क लग्न का संधि काल भी है। इससे पहले अपरान्ह में वृष लग्न 3 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट तक है। स्थाई लग्न दूसरा रात्रि 10 बजकर 4 मिनट से 12 बजे तक है। ज्योतिष संस्थान के बुद्धि प्रकाश ने कहा कि स्थिर लग्न में ही पूजा करनी चाहिए। वहीं बाबा अजीत पांडे ने कहा कि प्रदोष काल में पूजा करें। ज्योतिष आचार्य पंडित शिव शंकर ठाकुर  ने कहा कि कुल मिलाकर पूजा का इस बार कोई निषेध काल नहीं है।