देश
के जाने-माने फिल्म निर्माता और निर्देशक केतन मेहता की 'मांझी - द
माउंटेन मैन' फिल्म में राज्य के आठ बच्चे(9 से 14 वर्ष) अभिनय कर रहे हैं।
गरीबी में पल-बढ़ रहे बच्चों का सपना गया जिले में साकार हो रहा है। पहाड़
का सीना काटने वाले दशरथ मांझी के जीवन पर बनने वाली फीचर फिल्म की शूटिंग
पिछले पांच दिनों से उनके गांव गल्हौर में हो रही है। शूटिंग 9 नवंबर तक
चलेगी। इसके बाद बच्चें आगे की शूटिंग के लिए मुंबई जाएंगे। फिल्म में
अभिनय के लिए चुने गए बच्चे राज्य सरकार द्वारा संचालित
'किलकारी' संस्था से जुड़े हैं।
वन टेक ओके
किलकारी संस्था में नाट्य विधा की ट्रेनिंग देने वाले रवि भूषण बताते हैं कि फिल्म में काम करने वाले बच्चे मंजे हुए कलाकार की तरह वन टेक ओके दे रहे हैं। उनके प्रदर्शन से निर्माता-निर्देशक केतन मेहता काफी खुश है। उन्होंने बताया कि लगभग डेढ़ सप्ताह पहले बच्चों का ऑडिशन टेस्ट लेकर चुनाव हुआ था।
पारिश्रमिक नहीं स्कॉलरशिप
रविभूषण बताते हैं कि फिल्म में काम करने वाले बच्चों के लिए फिल्म निर्माता से उनके भविष्य और पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उन्हें पारिश्रमिक के बदले स्कॉलरशिप देने की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और कॅरियर बनाने में काफी मदद मिलेगी।
कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चे
किलकारी की प्रोग्राम आफिसर अनिता ठाकुर ने बताया कि संस्था में आने वाले अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। उनकी पृष्ठभूमि का अंदाजा आप इससे ही लगा सकते हैं कि फिल्म में काम करने वाले राहुल और चांदनी के पिता सड़क पर गोलगप्पा बेचते हैं। हेमा के पिता की फूल की दुकान है। दिवाकर के पिता बढ़ई मिस्त्री और पूजा के पिता धोबी हैं, जबकि ब्रजेश के पिता ऑटो और सुलेखा के पिता रिक्शा चालक हैं।
'किलकारी' संस्था से जुड़े हैं।
वन टेक ओके
किलकारी संस्था में नाट्य विधा की ट्रेनिंग देने वाले रवि भूषण बताते हैं कि फिल्म में काम करने वाले बच्चे मंजे हुए कलाकार की तरह वन टेक ओके दे रहे हैं। उनके प्रदर्शन से निर्माता-निर्देशक केतन मेहता काफी खुश है। उन्होंने बताया कि लगभग डेढ़ सप्ताह पहले बच्चों का ऑडिशन टेस्ट लेकर चुनाव हुआ था।
पारिश्रमिक नहीं स्कॉलरशिप
रविभूषण बताते हैं कि फिल्म में काम करने वाले बच्चों के लिए फिल्म निर्माता से उनके भविष्य और पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उन्हें पारिश्रमिक के बदले स्कॉलरशिप देने की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और कॅरियर बनाने में काफी मदद मिलेगी।
कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चे
किलकारी की प्रोग्राम आफिसर अनिता ठाकुर ने बताया कि संस्था में आने वाले अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। उनकी पृष्ठभूमि का अंदाजा आप इससे ही लगा सकते हैं कि फिल्म में काम करने वाले राहुल और चांदनी के पिता सड़क पर गोलगप्पा बेचते हैं। हेमा के पिता की फूल की दुकान है। दिवाकर के पिता बढ़ई मिस्त्री और पूजा के पिता धोबी हैं, जबकि ब्रजेश के पिता ऑटो और सुलेखा के पिता रिक्शा चालक हैं।
