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असीम से देशद्रोह का मुकदमा वापस ले सकती है पुलिस!

पूरे देश की नजर कार्टूनिस्ट असीम की गिरफ्तारी पर है। इंडिया अगेंस्ट करप्शन से जुड़े कानपुर के कार्टूनिस्ट असीम को मुंबई पुलिस ने रविवार को राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। असीम पर आरोप है कि उन्होंने आपत्तिजनक कार्टून बनाकर राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान किया। असीम पर साइबर क्राइम के तहत भी केस दर्ज किया गया है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक मुंबई पुलिस असीम पर से देशद्रोह का मुकदमा वापिस ले सकती है। असीम ने जमानत के लिए कोई याचिका नहीं डालने का फैसला किया है।

अन्ना हजारे के सहयोगी मयंक गांधी को कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी से मिलने की अनुमति पुलिस ने दे दी है। मयंक का आरोप था कि पुलिस उन्हें असीम से मिलने नहीं दे रही है। असीम की गिरफ्तारी को इंडिया अगेंस्ट करप्शन समेत तमाम कलाकारों और साहित्यकारों ने अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है। महाराष्ट्र के गृह मंत्री आर आर पाटिल ने कहा है कि वो पुलिस अधिकारियों से बात करेंगे और मामले की पूरी जानकारी लेंगे।
पुलिस हिरासत में भेजे जाने के बाद असीम ने कहा ‘मैं देशद्रोही हूं। अगर सच बोलना देशद्रोह है तो मैं सच बोलूंगा। बार-बार बोलूंगा। गांधी ने बोला था। भगत सिंह ने बोला था। मैं भी बोलूंगा। अगर एक सच्चा आदमी देशद्रोही है तो मैं देशद्रोही हूं। हां मैं देशद्रोही हूं।‘
मालूम हो कि मुंबई में हुए अन्ना के आंदोलन के दौरान कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी ने एक कार्टून बनाया था। इस कार्टून में राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न में मौजूद तीन सिंहों की जगह भेड़िए का सिर और सत्यमेव जयते की जगह भ्रष्टमेव जयते लिखा गया। पुलिस ने असीम के खिलाफ राजद्रोह के अलावा आईटी एक्ट, राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न एक्ट और साइबर क्राइम एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया है।
गौरतलब है कि राजद्रोह के जिस कानून के तहत असीम को गिरफ्तार किया गया है वो अंग्रेजों ने 1857 में स्वतंत्रता की पहली लड़ाई के तीन साल बाद 1860 में बनाया गया था। यानि अब ये कानून 152 साल पुराना हो चुका है। ऐसे में असीम ने देश के कर्ताधर्ताओं से एक अहम सवाल पूछा है। असीम ने कहा है कि ‘मैं इस देश की विधायिका और न्यायपालिका से मांग करता हूं कि ये स्पष्ट किया जाए कि क्या इस देश में एक आम आदमी को अपना मुंह खोलने पर, सच बोलने पर देशद्रोह का आरोप झेलना पड़ेगा, क्या देशप्रेम और देशद्रोह की परिभाषाएं अब बदल दी जाएंगी। ये सुनिश्चित करना होगा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में जनता की अभिव्यक्ति की आज़ादी सुरक्षित रहेगी।‘
इससे पहले महाराष्ट्र पुलिस असीम के पिता को उठा ले गई थी, जिन्हें भारी विरोध के बाद छोड़ना पड़ा था। असीम का आरोप है कि उन्हें बार-बार मुंबई पुलिस की तरफ से धमकाया गया। महाराष्ट्र पुलिस असीम को गिरफ्तार करने कानपुर भी गई थी, जहां विरोध के चलते उसे बैरंग लौटना पड़ा था। इसी साल असीम को सीरिया के कार्टूनिस्ट अली फर्जत के साथ एडिटोरियल कार्टूनिंग अवार्ड के लिए चुना गया था। अब गिरफ्तारी के बाद असीम को बांद्रा कोर्ट ने 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।