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कॉलेजों को वोकेशनल कोर्स चलाने के लिए विषयवार मानकों को करना होगा पूरा

विश्वविद्यालय के कॉलेजों को वोकेशनल कोर्स चलाने के लिए विषयवार मानकों को पूरा करना होगा। नए वाकेशनल कोर्स को चलाने के लिए भी इन शर्तों को पूरा करना होगा। इसके लिए राजभवन ने छह कुलपतियों की कमेटी बनाई है। 

इन छह कुलपतियों की कमेटी ने वोकेशनल कोर्स खासकर बीबीए, बीसीए आदि के लिए मानक बनाया है। इन मानक के तैयार होने के बाद अन्य विवि के अलावा टीएमबीयू से भी मंतव्य मांगा गया है। इसपर टीएमबीयू को यह भी रिपोर्ट भेजनी है कि किन कॉलेजों में कौन कोर्स चलते हैं और वह मानकों को कितना पूरा करते हैं।

टीएमबीयू ने इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए एक कमेटी भी बनाई है। बीसीए और बीआईटी के लिए तीन व्यक्ति डॉ. आशुतोष प्रसाद, कॉलेज इंस्पेक्टर साइंस डॉ. रंजना दुबे और डॉ. कमल प्रसाद, बीबीए के लिए डीन कॉमर्स डॉ. केसी झा, इंस्पेक्टर ऑफ कॉलेज आर्ट्स ऑन कॉमर्स डॉ. सरोज राय कमेटी में शामिल हैं। 

नए मानकों के अनुसार वोकेशनल कोर्स को चलाने के लिए कॉलेज के भवन में नहीं, बल्कि अलग से जमीन और भवन होना चाहिए। बच्चों की न्यूनतम संख्या 60 हो और उसी अनुसार शिक्षकों ऑर कर्मचारियों की भी संख्या निर्धारित हो। कॉलेज से अलग इन कोर्स के लिए सुविधाएं होनी चाहिए। जानकारी हो कि बीसीए का कोर्स टीएनबी, मारवाड़ी, एसएम, एसएसबी कॉलेज कहलगांव और जीवी कॉलेज नवगछिया में चलता है। वहीं बीबीए का कोर्स मारवाड़ी और एसएम कॉलेज में चलता है। इसके अलावा अन्य कई वोकेशनल कोर्स टीएमबीयू में चल रहे हैं।

पुराने कॉलेजों को दो साल का मौका
पुराने कॉलेज में वोकेशनल कोर्स पहले से चल रहा है। उन कॉलेजों को मानकों को पूरा करने के लिए दो साल का मौका दिया जाएगा। यदि दो साल में वे मानक पूरा नहीं करेंगे तो कोर्स की मान्यता समाप्त की जा सकती है, लेकिन नए कॉलेजों को यदि कोई वोकेशनल कोर्स चलाना है तो उन्हें इन मानकों को हर हाल में पूरा करना होगा। सीसीडीसी प्रो. केएम सिंह ने कहा कि वोकेशनल कोर्स की गुणवत्ता को और सुधारने के लिए ये मानक बनाए गए हैं, ताकि वोकेशनल कोर्स करने वाले छात्रों को पढ़ाई के बाद बेरोजगार नहीं बैठे।