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सोमवार, 3 जुलाई 2017

शहीद रतन सिंह को सलामी देने पहुंचे मनिंदरजीत सिंह बिट्टा

कारगिल शहीद रतन सिंह के गांव तिरासी पहुंच सलामी देते एमएस बिट्टा

राजेश कानोडिया, नवगछिया (भागलपुर) : भारतीय जवानों का कर्तव्य है कि वे मातृभूमि की रक्षा के लिए हमेशा सिर पर कफन बांध कर चलें। अपने जीवन के इसी कर्तव्य को निभाया है यहां के शहीद रतन सिंह ने। कारगिल युद्ध हो
या फिर 1965 व 1971 के युद्ध, सभी में शहादत देने वालों में बिहारियों की संख्या अधिक थी। बिहारी अपनी कुर्बानी देने में कभी पीछे नहीं हटते हैं। इन शहीदों की बदौलत ही 26जुलाई 1999 का दिन भारतवर्ष के लिए एक ऐसा गौरव लेकर आया, जब हमने सम्पूर्ण विश्व के सामने अपनी विजय का बिगुल बजाया था।
उक्त बातें रविवार को दिल्ली से नवगछिया पहुंचे अखिल भारतीय आंतकवाद निरोधक दस्ता के अध्यक्ष मनिंदर जीत सिंह बिट्टा ने कही। वे भागलपुर जिला के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत गोपालपुर प्रखंड के तिरासी गांव में शहीद रतन सिंह के 18वें शहादत दिवस पर उन्हें सलामी देने पहुंचे थे। उन्होंने शहीद रतन सिंह की पत्नी मीना देवी व उनके पुत्र रूपेश कुमार व ब्रजेश कुमार को मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
बताते चलें कि दो जुलाई 1999 को हवलदार रतन सिंह कारगिल पर्वत पर पाक समर्थित आतंकियों से लड़ते-लड़ते शहीद हुए थे। शहादत दिवस के मौके पर नवगछिया व्यवहार न्यायालय के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वितीय संतोष कुमार, गोपालपुर बीडीओ रत्ना श्रीवास्तव, सीओ, रतन सिंह के साथी गणोश मिस्त्री, मनोज झा सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे। जेड श्रेणी की सुरक्षा के बीच बीएस बिट्टा दिल्ली से हवाई मार्ग से पटना पहुंचे थे। वहां से चुनापुर पूर्णिया एयरपोर्ट पहुंचे। पूर्णिया से सड़क मार्ग से तिरासी गांव तक पहुंचे थे।
पाक को जवाब गोलियों से ही दिया जाएगा
बीएस बिट्टा ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी ही मातृभूमि से निकले पाकिस्तान को हमलोग कई बार सबक सिखा चुके हैं। गोलियों का जवाब गोलियों से ही दिया जाता है। गत दिनों हमारे 18 जवान शहीद हुए थे। उसके जवाब में हमारी फौज ने पाक सीमा के अंदर घुसकर 45 पाक फौजियों को मार गिराया। ऐसे वीरतापूर्ण कार्य करने वाले जवानों से भी राजनेता सवाल पूछते हैं। ऐसा कर वे लोग शहादत देने वाले जवानों का अपमान करते हैं। अब जवानों को हुक्म हैं कि यदि हमारे एक जवान शहीद हों तो उनके 50 जवानों को मार गिराओ। कश्मीर में पत्थरबाजों को भी सबक सिखाना होगा। उन्होंने कहा कि मुझ पर भी 18 बार आंतकवादियों ने बम व गोलियां बरसाईं। मेरे शरीर के हर हिस्से में स्टील रड फिट किया गया है। लेकिन हमलों से हमें डर नहीं लगता।
बिहार में शहीद जवान के परिजन को कम मिलती है मुआवजा राशि
बीएस बिट्टा ने कहा कि बिहार में शहीद जवानों के परिजनों को कम मुआवजा राशि मिलती है। यहां शहीद जवान के परिजन को महज पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। जबकि दूसरे प्रदेश हरियाणा में सरकार शहीद के परिजन को 50 लाख रुपये और दिल्ली एक करोड़ रुपये देती है। बिहार सरकार को मुआवजा राशि में बढ़ोत्तरी करनी चाहिए। परिजन को इंस्पेक्टर व नायब सुबेदार की नौकरी दी जानी चाहिए। बिहारी हर क्षेत्र में आगे रहते हैं। यहां उपजाऊ भूमि है, मेहनतकश किसान हैं। फिर भी बिहार गरीब है।
बिहारी राजनीति पर ली चुटकी
बिहार की राजनीति पर चुटकी लेते हुए कहा कि लालू यादव के एक बेटे उप मुख्यमंत्री, दूसरे स्वास्थ्य मंत्री व बेटी राज्य सभा की सांसद हैं। इन लोगों ने ऐसा कौन सा काम किया है जो इस तरह की उपाधि से नवाजा गया है। भाई-भतिजावाद से उठकर सोचना होगा, तभी बिहार आगे बढ़ेगा।

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