आज से पितृ पक्ष शुरू हो गया है। पितृपक्ष यानी ऐसा समय जब पिंड दान कर पिता के ऋण से मुक्ति पाई जाती है। बिहार के गया जिले में पिंड दान की सबसे ज्यादा मान्यता है। यहां आज से पितृ पक्ष मेले की शुरूआत हो गई। ये मेला अगले 17 दिनों तक चलेगा। इन 17 दिनों के दौरान गया में लाखों लोग आते हैं। ऐसी मान्यता है की यहां फल्गु नदी के किनारे पिंड दान करने से पिता का ऋण खत्म हो जाता है।
बिहार की राजधानी पटना से तकरीबन सौ किलोमिटर दूर बसा है गया शहर। ऐसा शहर जहां साल में एक बार 17 दिनों के लिए मेला लगता है। पितृ-पक्ष मेला। ऐसा मेला जहां लोग अपने पुर्वजों को मुक्ती दिलाने के लिये आते हैं। कहा जाता है इस पितृ पक्ष में फल्गु नदी के तट पर विष्णुपद मंदिर के करीब और अक्षयवट के पास पिण्ड दान करने से पूर्वजों को मुक्ती मिलती है।
श्रीनाथ तुलसी दास (मंहत) यहां के पितृ पक्ष में पिण्ड दान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। गया में पिण्डदान की परंपरा श्रीष्टी के रचना काल से ही शुरू है। जिसका वर्णन वायु पुराण, अग्नी पुराण और गरूण पुराण में है। कहा जाता है की ब्रह्मा ने अपने पूर्वजों का इसी फल्गु नदी के तट पर पिंड दान किया था। और त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने भी अपने पिता राजा दशरथ के मरने के बाद यहीं पिंड दान किया था। जिसके बाद यहां सीताकुंड नाम से एक मंदिर भी है।
इसी पौराणिक मान्यता के चलते गया में पितृ पक्ष के दौरान लाखों लोग यहां आकर अपने पितरों को दान अर्पण करते हैं। इस बार भी पितृ पक्ष मेले में दस लाख से ज्यादा लोगों की आने की सम्भावना है जिसके मद्देन्रुार कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। लोगों को यहां किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए भी पूरे इंतजाम किए गए हैं।
एसएसपी गया निशांत तिवारी ने कहा कि सुरक्षा के मद्देनजर जिले को 42 जोन में बांट गया है। किसी को कोई परेशानी ना हो इसकी खाश व्यवस्था की गई है।
जिला प्रशासन ने साफ सफाई और लोगों के ठहरने के बी पुक्ता इंतजाम किए हैं। लोगों के रहने के इंतजाम के लिए शहर को 32 जोन में बांटा गया है। और बाहर से आने जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है।
घाटों पर प्रशासन की तरफ से दर्जनों कर्मचारियों की तैनाती की गई है। हेल्पलाइन के तौर पर प्रशासन ने नम्बर भी जारी किए हैं। पिंड दान करने आने वाले लोगों को कोई भी परेशानी हो तो इन नंबरों पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
