मोदी सरकार के पहले आम बजट के रूप में जेटली की पोटली को कई लोगों ने सराहा तो कई लोगों ने नकार भी दिया। जिसे गुरुवार को लोक सभा में वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश किया गया था।
इस बजट भाषण के माध्यम से जहां जूते, चप्पल, स्टील के बर्तन, डब्बा बंद खाना, मोबाइल एवं टीवी के पुर्जे, वायु तथा सौर ऊर्जा के उपकरण इत्यादि को सस्ता करने तथा रेडीमेड कपड़े, सौदर्य सामग्री, गुटखा, पान मसाला, सिगरेट, तम्बाकू, कोल्ड ड्रिंक सहित मोबाइल और इन्टरनेट पर विज्ञापन को महंगा करने की घोषणा की गयी है।
इस बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए युवा मोबाइल व्यवसायी विक्रम कुमार शर्मा ने भरपूर प्रशंसा की। साथ ही आयकर की बढ़ी सीमा को भी सही बताया। वहीं इलाहाबाद बैंक के मैनेजर कमलेश पाण्डेय ने भी आयकर में बढ़ी सीमा से काफी लोगों को राहत मिलने की बात कही। साथ ही देश के वित्तीय ढांचे को मजबूत करने वाला बजट बताया।
जबकि अनुमंडल मुख्यालय में कार्यरत वरिष्ठ कर्मी ने इसे ऊंट के मुंह में जीरा का फ़ोरन कहा। जिनके अनुसार इस सीमा को बढ़ाकर पाँच लाख किया जाता तो अधिकांश लोगों को राहत मिलती। लेकिन वहीं दीपक कुमार ने कहा कि मैं तो अब दो साल के लिये आयकर के दायरे से बाहर हो जाऊंगा।
किसान महासभा के विजय कुमार साहू ने इस बजट को पूंजी वादी विचारधारा का बजट करार दिया । तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विश्व विद्यालय संयोजक अजय कुमार सिंह ने कहा कि देश में पाँच आईआईटी और पाँच आईआईएम की स्थापना कर यह सरकार छात्रों के भविष्य को सँवारने के लिये बहुत बड़ा कदम उठा रही है। इसके लिए जितनी भी प्रशंसा की जाय, कम है। वहीं लोजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष परवेश कुमार ने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना से हर जगह खुशी की लहर दौड़ गयी है।


