दीपावली के मौके पर बिहार में बक्सर स्थित 70 कैदियों की खुली जेल में इस बार कैदी अपने
परिवार संग दिवाली मना सकेंगे। इस खुली जेल में जो कैदी बंद हैं उनमें से तीन को
फांसी की सजा सुनाई गई है। इस के अलावा कई कैदी उम्रकैद की सजा यहां पर काट
रहे हैं। बिहार के विभिन्न जेलों से करीब 74 कैदियों को लाकर यहां रखा गया
है। इन्हें इनके आचरण के आधार पर चुना गया। परिवार संग दिवाली मनाने की
घोषणा के पीछे
सरकार का मकसद इन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने का है। कैदियों को अपने परिवार संग रहने के लिए इस जेल कंपाउंड में ही फ्लैट बनाए गए हैं। बिहार के इस ओपन जेल का उद्घाटन मौजूदा मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने 23 मई को किया था। इस घटना से पूरे विश्व का ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ था।
कैदियों संग दिवाली मनाने की मंशा के बीच एक दस वर्ष की बच्ची पिंकी भी यहां पहुंची है। पिंकी के अंकल मनोज पासवान पिछले बारह वर्षो से जेल में बंद हैं। पिंकी से मिलने के बाद पासवान की खुशी भी देखने वाली थी। उसने बताया कि उसे यह नहीं लगता है कि वह जेल में है। यहां आने वालों में पिंकी ही नहीं बल्कि बारह वर्ष का गोलू भी शामिल है जो गोपालगंज से यहां आया है।
इस जेल में रहने वाले कैदियों को बाहर जाकर नौकरी करने की भी छूट दी गई है। यहां मौजूद कई कैदी दिन के 13 घंटे जेल से बाहर मनरेगा के तहत काम करने जाते हैं।
सरकार का मकसद इन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने का है। कैदियों को अपने परिवार संग रहने के लिए इस जेल कंपाउंड में ही फ्लैट बनाए गए हैं। बिहार के इस ओपन जेल का उद्घाटन मौजूदा मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने 23 मई को किया था। इस घटना से पूरे विश्व का ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ था।
कैदियों संग दिवाली मनाने की मंशा के बीच एक दस वर्ष की बच्ची पिंकी भी यहां पहुंची है। पिंकी के अंकल मनोज पासवान पिछले बारह वर्षो से जेल में बंद हैं। पिंकी से मिलने के बाद पासवान की खुशी भी देखने वाली थी। उसने बताया कि उसे यह नहीं लगता है कि वह जेल में है। यहां आने वालों में पिंकी ही नहीं बल्कि बारह वर्ष का गोलू भी शामिल है जो गोपालगंज से यहां आया है।
इस जेल में रहने वाले कैदियों को बाहर जाकर नौकरी करने की भी छूट दी गई है। यहां मौजूद कई कैदी दिन के 13 घंटे जेल से बाहर मनरेगा के तहत काम करने जाते हैं।
