शनिवार यानि आज से श्राद्ध शुरू हो रहे हैं। हिन्दू समाज में इसका विशेष महत्व होता है। पितरों की शांति के लिए नियमित रूप से तर्पण किया जाता है। बताया जाता है कि ऐसा करने से पितृ दोष दूर हो जाता है। आज से पितरों को तृप्त करने का कार्य शुरू हो जाएगा, क्योंकि श्राद्ध पक्ष शुद्ध भाद्रपद में ही प्रारंभ हो जाता है और यह घड़ी आ गई है। शास्त्रों के अनुसार श्राद्धों में कोई भी अच्छा (मांगलिक) कार्य नहीं किया जाता है। चूंकि शुभ कार्यो को वर्जित मना जाता है। लिहाजा, ऐसा करने से मना किया जाता है।
शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित शिव शंकर ठाकुर श्राद्ध के बारे में बताते हैं कि
श्राद्धों में प्रतिदिन तर्पण करने चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से पितृ प्रसन्न और तृप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि श्राद्ध का समापन पितृविसर्जनी सोमवती अमावस्या पर होगा। जिन पितरों की मृत्यु पूर्णिमा को हुई है, उनका श्राद्ध 29 सितम्बर को होगा। अगले दो दिन तीस सितम्बर को पड़वा का श्राद्ध मनाया जा सकता है। वहीं कार्य के दोनों दिन प्रतिपदा तिथि का समावेश रहेगा। इस बार भादों में भी दो श्राद्ध पक्ष संपन्न होंगे।
शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित शिव शंकर ठाकुर श्राद्ध के बारे में बताते हैं कि
श्राद्धों में प्रतिदिन तर्पण करने चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से पितृ प्रसन्न और तृप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि श्राद्ध का समापन पितृविसर्जनी सोमवती अमावस्या पर होगा। जिन पितरों की मृत्यु पूर्णिमा को हुई है, उनका श्राद्ध 29 सितम्बर को होगा। अगले दो दिन तीस सितम्बर को पड़वा का श्राद्ध मनाया जा सकता है। वहीं कार्य के दोनों दिन प्रतिपदा तिथि का समावेश रहेगा। इस बार भादों में भी दो श्राद्ध पक्ष संपन्न होंगे।