शनिवार, 16 जून की रात 10 बजे सारे ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाएंगे, जिससे
सैकड़ों साल बाद दुर्लभ कालसर्प योग बनेगा। ग्रहों की यह स्थिति 1 जुलाई तक रहेगी। इसी दौरान 26 जून को शनि भी अपनी चाल बदलेगा। ये घटना बहुत ही दुर्लभ है। पिछले 100 से अधिक सालों में ऐसा देखने में नहीं आया कि शनिवार को शुरू होने वाले कालसर्प योग के चलते शनि ने अपनी चाल बदली हो। कालसर्प योग खत्म होने के कुछ ही दिनों पहले शनि सीधा होगा। कालसर्प के इन 15 दिनों में से 10 दिन तो शनि टेढ़ा ही चलेगा। जो कि अशुभ फल देने वाला रहेगा।राहु और केतु के कारण कालसर्प योग बनता है। राहु और केतु शनि के दोनों हाथ है। शनि किसी को भी कर्मो का फल देता है तो राहु और केतु के द्वारा ही देता है। शनिवार को ही राहु और केतु के कालसर्प योग बनने और वक्री शनि के चाल बदलने के कारण ये घटना बहुत बड़ी और असरदार रहेगी।
सैकड़ों साल बाद दुर्लभ कालसर्प योग बनेगा। ग्रहों की यह स्थिति 1 जुलाई तक रहेगी। इसी दौरान 26 जून को शनि भी अपनी चाल बदलेगा। ये घटना बहुत ही दुर्लभ है। पिछले 100 से अधिक सालों में ऐसा देखने में नहीं आया कि शनिवार को शुरू होने वाले कालसर्प योग के चलते शनि ने अपनी चाल बदली हो। कालसर्प योग खत्म होने के कुछ ही दिनों पहले शनि सीधा होगा। कालसर्प के इन 15 दिनों में से 10 दिन तो शनि टेढ़ा ही चलेगा। जो कि अशुभ फल देने वाला रहेगा।राहु और केतु के कारण कालसर्प योग बनता है। राहु और केतु शनि के दोनों हाथ है। शनि किसी को भी कर्मो का फल देता है तो राहु और केतु के द्वारा ही देता है। शनिवार को ही राहु और केतु के कालसर्प योग बनने और वक्री शनि के चाल बदलने के कारण ये घटना बहुत बड़ी और असरदार रहेगी।