पूजा और पाठ नहीं प्रेम के भूखे हैंै भगवान। प्रेम की प्रगाढ़ता पर निर्भर करती है इंसान से भगवान की दूरी। यदि पूजा-पाठ करनी भी हो तो अगाध प्रेम देने के उद्देश्य से पूजा पाठ करनी चाहिए। प्रेम पूर्वक अंतरात्मा से भगवान का नाम लेने से अदभुत शक्ति प्राप्त होती है। जिससे सारी बुराई समाप्त होती है तथा मोक्ष की प्राप्ति संभव है। भगवान की पूजा नि:स्वार्थ भाव से करनी चाहिए। पूजा के बदले में किसी भी चीज की कामना नहीं करनी चाहिए। तभी इस जीवन की सार्थकता होगी और सफलता मिलेगी। उपरोक्त बातें मारवाड़ी विवाह भवन में आयोजित श्री आध्यात्मिक ज्ञान योग समिति द्वारा अनुपम प्रवचन एवं सत्संग के छठे दिन के व्याख्यान के दौरान राजस्थान के प्रोफेसर डाक्टर भीकमचंद प्रजापति ने कही । व्याख्यानमाला के आयोजक दिनेश प्रसाद सर्राफ, शंकर लाल चिरानियां एवं दयाराम चौधरी ने बताया कि यह कार्यक्रम 31 मार्च तक चलेगा।