बाढ़ से सुरक्षा की योजनाओं का जल संसाधन मंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण एवं स्थल निरीक्षण
राजेश कानोडिया, भागलपुर। राज्य के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने मंगलवार को दिनभर कटिहार बाढ़ प्रक्षेत्र के अंतर्गत भागलपुर और कटिहार जिले में विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही बाढ़ सुरक्षात्मक योजनाओं का हवाई सर्वेक्षण एवं स्थल निरीक्षण किया। दौरे के अंत में जिला अतिथिगृह भागलपुर में विभागीय एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रक्षेत्र में चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की तथा जरूरी निर्देश दिये। इस दौरान उन्होंने जिन योजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा नहीं किया जा सका है, उसके विलंब के कारणों की समीक्षा कर संवेदक के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने के निर्देश दिये। हवाई सर्वेक्षण एवं स्थल निरीक्षण के दौरान जल संसाधन विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल तथा बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण के वरीय अधिकारी मौजूद थे।
कटिहार बाढ़ प्रक्षेत्र में 2022 की बाढ़ से पूर्व भागलपुर जिलान्तर्गत 13, कटिहार जिलान्तर्गत 10, पूर्णिया जिलान्तर्गत 10, अररिया जिलान्तर्गत 4, किशनगंज जिलान्तर्गत 6 और लखीसराय जिलान्तर्गत 3 कटाव निरोधक योजनाओं, अर्थात् कुल 46 कटाव निरोधक योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई थी। जल संसाधन मंत्री भागलपुर और कटिहार जिले की कई योजनाओं के हवाई सर्वेक्षण के उपरांत उच्च विद्यालय नवगछिया में बने हेलीपैड स्थल पर पहुंचे।
उन्होंने नवगछिया से सड़क मार्ग द्वारा इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध के टुटान बिंदु पर जाकर वहां कराये जा रहे कटाव निरोधक कार्य का स्थल निरीक्षण किया। जल संसाधन विभाग द्वारा बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल नवगछिया के अधीन इस्माईलपुर-बिंदटोली तटबंध के स्पर संख्या 02 एवं 03 के बीच और स्पर संख्या 6N एवं 07 पर कटाव निरोधक कार्य कराया जा रहा है। इन कार्यों का निरीक्षण करने के उपरांत जल संसाधन मंत्री ने कार्य की रफ्तार बढ़ाने सहित कई निर्देश दिये।
इसके बाद जल संसाधन मंत्री विभागीय अधिकारियों के साथ भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड में गंगा प्रसाद जमींदारी बांध पर कराये जा रहे कटाव निरोधक कार्य का विभागीय अधिकारियों के साथ स्थल निरीक्षण किया और कार्य की अद्यतन प्रगति की समीक्षा कर जरूरी निर्देश दिये।
इसके बाद जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने सड़क मार्ग से जाह्नवी चौक पहुंच कर इस्माइलपुर-जाह्नवी चौक तटबंध निर्माण कार्य का स्थल निरीक्षण किया। भागलपुर जिले में गंगा नदी के बाएं किनारे पर इस्माईलपुर से जाह्नवी चौक तक 10.5 किमी लंबाई में बन रहे तटबंध और तीन एंटी फ्लड स्लुइस गेट के निर्माण कार्य का स्थल निरीक्षण किया। तीन एंटी फ्लड स्लुइस गेट में से दो का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि तीसरे का निर्माण कार्य प्रगति पर है। जल संसाधन विभाग की इस योजना का उद्देश्य नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत इस्माइलपुर, गोपालपुर और नवगछिया प्रखंड की बाढ़ से प्रभावित होने वाली आबादी और कृषि योग्य भूमि को सुरक्षा प्रदान करना है।
जल संसाधन मंत्री श्री संजय कुमार झा ने जिन योजनाओं का हवाई सर्वेक्षण किया, उनमें महानंदा बाढ़ प्रबंधन योजना फेज-II के तहत 198 किलोमीटर नये तटबंध के निर्माण स्थल का निरीक्षण शामिल है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो गई है।
उल्लेखनीय है कि महानंदा बाढ़ प्रबंधन योजना के तहत कटिहार बाढ़ प्रक्षेत्र के अंतर्गत कुट्टीघाट- झौआ महानंदा दायें तटबंध पर 66.23 किमी, बाढ़ नियंत्रण सालमारी के अंतर्गत कुट्टीघाट बागडोभ महानंदा बाएं तटबंध पर 46 किमी और नागर दाएं तटबंध पर 20.10 किमी तथा बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल किशनगंज के अंतर्गत रतवा नदी के बाएं एवं दाएं किनारे पर 66.02 किमी, अर्थात कुल 198.37 किमी लंबाई में नये तटबंध के निर्माण का प्रस्ताव है। इस कार्य से कई प्रखंडों को बाढ़ की समस्या से निजात मिलेगी।
उधर, भागलपुर जिलान्तर्गत पीरपैंती प्रखंड में गंगा नदी के दाहिने किनारे स्थित टपुआ ग्राम की सुरक्षा के लिए विभाग द्वारा कटाव निरोधक कार्य कराया गया है। यह कार्य पूर्ण हो चुका है।
इसी तरह गंगा नदी के बाएं किनारे काटा कोश से गोवागाछी तक तटबंध निर्माण और हरदेव टोला से चौकिया पहाड़पुर तक उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकऱण का कार्य प्रस्तावित है। इस कार्य के लिए भूअर्जन की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। जल संसाधन मंत्री ने विभागीय अधिकारियों के साथ इस तटबंध के स्थल का भी हवाई सर्वेक्षण किया।
उधर, गंगा नदी के बाएं किनारे केवाला ग्राम से बाघमारा ग्राम तक 5200 मीटर लंबाई में बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य 2020-21 में कराया गया था। बाढ़ 2021 के दौरान इसका कुछ भाग आंशिक क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसका पुनर्स्थापन कराया जा रहा है। इस कार्य से मनिहारी प्रखंड के अंतर्गत केवाला, दिलारपुर, बौलिया, बाघमारा, गांधी टोला, सिग्नल टोला आदि सहित कई गांवों को बाढ़ की समस्या से निजात मिलेगी। साथ ही, कारी-कोशी तटबंध की भी बाढ़ से सुरक्षा होगी।