नवगछिया। गंगा के किनारे किनारे आदिवासियों की तरह आदम युग से जिंदगी जीने वाले गंगोता जाति को आज तक आरक्षण का सही दर्जा नहीं मिल पाया है। जिसके लिए गंगोत्री जागरण मंच 2007 से ही संघर्षरत है। इसके लिए 15 मार्च 2012 को संसद में मुजफ्फरपुर के सांसद ने आवाज उठायी थी। इसके बाद 8 मार्च 2013 को रूपौली की विधायक बीमा भारती ने भी बिहार विधान सभा मेआवाज उठायी है। इसके बावजूद भी अब तक इस जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल नहीं किये जाने का भारी क्षोभ है।
उपरोक्त बातें गंगोत्री जागरण मंच की आवश्यक बैठक की अध्यक्षता कर रहे इस्माइलपुर जयमंगल टोला निवासी गुलशन कुमार मंडल ने कही। जहाँ मौके पर मौजूद डॉ रमेश आत्मविश्वास ने बताया कि इस जाति के लोग सिर्फ बिहार में ही पाये जाते हैं। वह भी मात्र आठ जिलों में ही। इसके बावजूद बिहार सरकार इस जाति के आर्थिक शैक्षणिक विकास की बात नहीं सोच पा रही है। उन्होंने बताया कि इस जाति के लोग भागलपुर जिले में सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, मधेपुरा, खगडिया और बेगुसराय जिला में भी इस जाति के लोग हैं।
बैठक के दौरान ही मंच के संयोजक प्रमोद कुमार मंडल ने कहा कि गंगोता जाति को पहले गंगापूत और बाद में गंगोत्री के नाम से जाना जाता था। जिसे अब गंगोता के नाम से जाना जाता है। इस जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल कराने को लेकर जल्द ही पटना की सड़कों पर किया जाएगा जोरदार आंदोलन। इस बैठक में श्रवण बिहारी ब्रह्मदेव ब्रह्म लक्ष्मण मंडल सुजीत मंडल सुभाष मंडल प्रमोद मंडल मुकुंद मंडल जयप्रकाश मंडल सहित दर्जनों लोग शामिल थे।