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बिहार चुनाव में राजग को करनी होगी अच्छी तैयारी : कुशवाहा


इस साल के आखिर में बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी सहयोगी भाजपा को सतर्क करते हुए कहा है कि राज्य में जदयू, राजद को रोकने के लिए राजग को अच्छी तैयारी करनी होगी। भाजपा पिछले साल लोकसभा चुनाव के बाद राज्य हुए चुनावों में जीत से खासी उत्साहित है।
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के प्रमुख कुशवाहा ने कहा, ‘थोड़ा सतर्क होने की जरूरत है। अगर राजद और जदयू अलग होते तो, राजग के लिए चुनाव में जीत आसान होती। लेकिन जब से दोनों साथ आए हैं, हमें थोड़ा और सतर्क होने तथा उचित रणनीति बनाने की जरूरत है।’ उनकी चिंता की वजह पिछले साल अगस्त में बिहार की 10 सीटों पर हुए विधानसभा के उप चुनाव के नतीजे हैं जिनमें से राजग को केवल चार सीटों पर विजय मिली थी। बाकी छह सीटों पर जदयू-राजद और कांग्रेस का गठबंधन जीता था।
राजग के लिए यह परिणाम लोकसभा चुनाव के सिर्फ तीन महीने बाद आए थे। लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के प्रभाव ने विपक्ष को सीमित करते हुए बिहार में 40 लोकसभा सीटों में से 31 सीटों पर राजग को विजय दिलाई थी। भाजपा नीत गठबंधन में एक वर्ग का मानना है कि जदयू, राजद और कांग्रेस का गठबंधन वास्तव में यादव, दलित, अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी), कुर्मी और मुस्लिमों का इंद्रधनुषी गठबंधन है जो संख्या की दृष्टि से राजग के लिए गंभीर चुनौती पेश कर सकता है।
कुशवाहा काराकाट से लोकसभा सदस्य हैं और केंद्रीय ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेय जल और स्वच्छता राज्य मंत्री हैं। वह कुशवाहा (कोइरी) समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं। उन्होंने बिहार में नीतिश कुमार के जदयू से अलग होने के बाद राजग के साथ गठबंधन किया।
लोकसभा में मोदी लहर पर सवार होकर उनकी पार्टी ने उन तीनों सीटों पर जीत हासिल की थी जिन पर उन्होंने चुनाव लड़ा था। हालांकि कुशवाहा ने राष्ट्रीय स्तर पर बिखरे हुए जनता परिवार के साथ आने को खारिज किया क्योंकि उनका मानना है कि लालू की अगुवाई वाली राजद और कुमार की जदयू का राज्य में ही गठबंधन होगा, अन्यथा उन्हें करारी पराजय का सामना करना पड़ेगा।
कुशवाहा ने कहा कि जदयू और राजद के पास हाथ मिलाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार बदलाव की ओर देख रहा है। अपने 30 साल के राजनीतिक जीवन में कुशवाहा लोकदल, जनता दल, जनता दल (यूनाइटेड) जैसे दलों के साथ रहे। कुमार का साथ छोड़ने से पहले वह राज्यसभा सदस्य थे। बिहार में हर चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते हैं। भाजपा, राजद, जदयू या पहले समता पार्टी के अलग अलग चुनाव में अलग अलग सहयोगी रहे हैं।
राम विलास पासवान पहले दलित वोटों के प्रमुख दावेदार थे। वह पिछले कुछ सालों में पूर्व मुख्यमंत्री नीतिश कुमार द्वारा महादलितों की आवाज उठाने की वजह से हाशिए पर चले गए। पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी और कुशवाहा की आरएलएसपी दोनों ही बिहार आधारित दल हैं जिसे देखते हुए राजग में आने वाले दिनों में सीटों के लिए कड़ी सौदेबाजी हो सकती है।
कुशवाहा ने कहा कि जनता पार्टी और जनता दल भ्रष्टाचार और वंशवाद जैसी बुराईयों का इस्तेमाल कांग्रेस पर हमला करने के लिए करते थे, लेकिन बिखरा हुआ समूह इससे खुद ही ‘त्रस्त’ है। साथ ही हालात भी बदल गए हैं।