शक्ति स्वरूपा मां भगवती की आराधना का विशेष पर्व है शारदीय नवरात्र। इसमें मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा आराधना की जाती है। नवरात्र में देवी भक्त निराहार व फलाहार व्रत रहकर पूजा स्थान पर अख्ाड ज्योति प्रज्ज्वलित कर मां से मनोकामना सिद्धि की प्रार्थना करेंगे। नवगछिया के दुर्गा स्थान मंदिर और तेतरी दुर्गा मंदिर तथा भ्रमरपुर दुर्गा मंदिर सहित विभिन्न दुर्गा मंदिरों में आज से नौ दिन तक देवी भक्तों का सैलाब उमड़ेगा।
कलश स्थापना के तीन शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त-प्रात: 11:48 से 12:34 तक
लाभ मुहूर्त- 12:13 से 1:43 तक
अमृत काल मुहूर्त- 1:07 से 2:51 तक
उपवास का महत्व
नवरात्र में उपवास रखने का आयुर्वेद के अनुसार भी महत्व है। मौसम परिवर्तन के समय उपवास करने से अनेक बीमारियों से भी राहत मिलती है। वैद्य संजीव मिश्र के अनुसार उपवास करने से शारीरिक व मानसिक शक्ति बढ़ती है, साथ ही ऊर्जा का भी विकास होता है। नियम संयम से शरीर शुद्ध होता है।
कन्या पूजन व भोज का महत्व
नवरात्र में कन्या पूजन के लिए दो से दस वर्ष की कन्याओं को मां का स्वरूप माना जाता है। इस उम्र की कन्याओं को ही भोज कराना चाहिए। भोज में कन्याओं की संख्या के अनुसार अलग-अलग फल की प्राप्ति होती है। एक को भोज से ऐश्वर्य, दो से मोक्ष, तीन से धर्म, चार से राज्य पद, पांच से विद्या, छह से सिद्धि, सात से राज्य, आठ से धन और नौ कन्याओं के पूजन से जमीन के स्वामित्व प्राप्ति का लाभ मिलता है।
