ताजा समाचार :

6/Posts/ticker posts

कैंसर की चपेट में आ रहा है भागलपुर जिला का क्षेत्र


राजेश कानोडिया, नवगछिया। 
भागलपुर जिला सहित कोसी व गंगा किनारे बसे इलाकों को आर्सेनिक ने पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया है। इस कारण इन क्षेत्रों के लोग तेजी से कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। साथ ही खाद्य पदार्थो में कीटनाशकों का प्रयोग भी कैंसर का एक प्रमुख कारण है। 
काफी विरोध के बाद इंडोसल्फास की बिक्री पर प्रतिबंध लगा। लेकिन अब भी सब्जियों और फलों में कई तरह के कीटनाशक का प्रयोग जारी है। कीटनाशक ने लोगों के शरीर में अपनी जगह बनानी शुरू कर दी है। यह मनुष्य के खून में धीरे-धीरे कचरे की तरह जम जाता है। आगे चलकर खून में जमे कीटनाशक कैंसर का रूप लेने लगते हैं। कोई भी सेल एबनॉर्मल हो कर कैंसर सेल में बदल जाती है।

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर प्राणी विज्ञान विभाग में आयोजित ‘प्राणी विज्ञान में सूचनाओं का महत्व’ विषय पर आयोजित सेमिनार में महावीर कैंसर संस्थान, पटना की डॉ.अखिलेश्वरी नाथ ने उक्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेपाल में पहाड़ से पत्थर टूट-टूट कर कोसी नदी में मिल जाते हैं। पेड़-पौधे कट जाने की वजह से पत्थर पानी के तेज वेग को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। कोसी नदी जब गंगा में मिलती है तो आर्सेनिक भी साथ ले आती है। इसके साथ ही दिल्ली व उत्तर प्रदेश में कारखाने से निकलने वाले खतरनाक कचरे से भी गंगा नदी सहित पानी के अन्य स्रोतों में आर्सेनिक घुल जाते हैं। 
बोरिंग, ट्यूबवेल व कुएं में भी प्रचुर मात्र में आर्सेनिक पाया गया है। डॉ. नाथ ने कहा कि लोग बड़े आकार के प्याज व गोभी चुनकर घर ले जाते हैं। उन्हें यह मालूम नहीं है कि इसमें जहरीले कीटनाशक का प्रयोग किया गया है। यह कीटनाशक मनुष्य के शरीर में जाकर लाइलाज बीमारी में बदल जाता है। भागलपुर व आसपास के क्षेत्रों हो रहे कैंसर का मुख्य कारण कीटनाशक व आर्सेनिक है। भारत सरकार ने महावीर कैंसर संस्थान में एचपीएलसी मशीन लगाई है। इस मशीन में खून को डालकर कीटनाशक की मात्र ज्ञात की जाती है। वहीं एएएस मशीन की भी कमोबेश यही काम है।
बताते चलें कि भागलपुर जिला अंतर्गत नवगछिया एवं इसके आसपास के इलाकों में कैंसर से दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि इस इलाके के लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर यह रोग कैसे हो जाता है। इसके साथ ही इस क्षेत्र के लोगों के लिये शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। साथ ही कीटनाशक युक्त सब्जी खाना भी लोगों की मजबूरी होती है। जिसके फलस्वरूप इस इलाके के लोग कैंसर रोग से ग्रसित हो रहे हैं। जिसके लिये एक जागरूकता अभियान चलाने की भी जरूरत है।