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दुष्कर्म के आरोपी सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए.के. गांगुली का इस्तीफा स्वीकार


पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम. के. नारायणन ने सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए.के. गांगुली का पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा स्वीकार कर लिया। राज्य सरकार ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। लॉ इंटर्न द्वारा दुष्कर्म का आरोप लगाए जाने के बाद चारो तरफ से पड़ रहे दबाव के आगे झुकते हुए गांगुली ने सोमवार को मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। गांगुली ने राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया, "पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के प्रधान सचिव ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सूचित किया कि गांगुली ने पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की इच्छा व्यक्त करते हुए छह जनवरी की तिथि वाला एक पत्र सौंपा है।"
विज्ञप्ति में आगे कहा गया है, "राज्यपाल ने तत्काल प्रभाव से उनका (गांगुली) इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।"
सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि मानवाधिकार आयोग के सदस्य नपराजित मुखर्जी नया अध्यक्ष नियुक्त किए जाने तक आयोग के अध्यक्ष का कार्यभार संभालेंगे।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गांगुली के खिलाफ कार्रवाई में सरकार को दूरी बनाए रखने की मांग वाली याचिका खारिज किए जाने के कुछ ही घंटों बाद गांगुली ने अपना इस्तीफा सौंप दिया।
गांगुली ने हालांकि कहा कि उनका जनहित याचिका से कोई लेनादेना नहीं है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पहले ही गृह मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें राष्ट्रपति के संदर्भ से सर्वोच्च न्यायालय को मामले की जांच के लिए कहा गया है।
प्रस्ताव राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भेजा गया है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि राष्ट्रपति मामले की जांच की संस्तुति देश के प्रधान न्यायाधीश को भेजें।