तमाम सियासी पैंतरेबाजी के बाद आखिरकार कांग्रेस उपाध्याक्ष राहुल गांधी के सामने यूपीए सरकार ने घुटने टेक ही दिए। सजायाफ्ता सांसदों और विधायकों की सदस्यता बचाने के लिए लाए गए अध्यादेश को कैबिनेट ने वापस लेने का फैसला किया है। बुधवार की शाम 6 बजे सिर्फ 15 मिनट के लिए कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में यूपीए के सहयोगी दलों की नराजगी को भी नजरअंदाज कर दिया गया। इतना ही नहीं, सरकार अब दागी नेताओं को बचाने वाले बिल को भी वापस लेगी।
कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने बताया कि यह फैसला कैबिनेट की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। उन्होंने बताया कि संसद के अगले सत्र के दौरान संबंधित बिल भी तय प्रक्रिया के मुताबिक वापस ले लिया जाएगा।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले राहुल ने अध्यादेश को बकवास बताते हुए फाड़कर फेंकने की बात कही थी, जिसके बाद से इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद खडा़ हो गया है। तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। कहा जा रहा था राहुल का बयान प्रधानमंत्री का अपमान है। वहीं यूपीए के कई सहयोगी दल राहुल के बयान से नाराज थे। एनसीपी, एनसी, आजरेडी और समाजवादी पार्टी किसी भी कीमत पर अध्यादेश वापसी के पक्ष पर नहीं थे।
