23 साल पुराने मेडिकल फर्जीवाड़ा मामले में कांग्रेस के राज्यसभा
सांसद ऱशीद मसूद को 4 साल की सजा सुनाई गई है। रशीद मसूद पर मेडिकल एडमिशन
में फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। दिल्ली की तीजहजारी कोर्ट ने मसूद को इस
फर्जीवाड़े में दोषी करार देते हुए उन्हें 4 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट
द्वारा दोषी करार दिए जाने के फौरन बाद ही रशिद मसूद को हिरासत में ले लिया
गया। कोर्ट ने मसूद को प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के अलावा आईपीसी की धारा
120बी यानी आपराधिक षडयंत्र, 420 में धोखाधड़ी और 468 के तहत फर्जीवाड़े
का दोषी माना है।
मेडिकल एडमिशन फर्जीवाड़ा मामले में कांग्रेस सांसद रशीद मसूद के सजा के
ऐलान के बाद वो पहले नेता होंगे जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक
संसद में अपनी सदस्यता गंवानी होंगी। इससे पहले इस पूरे फर्जीवाड़ा मामले
पर 19 सितंबर को ही जिरह पूरी कर ली गई थी। 19 सितंबर को जिन धाराओं में
राशीद को दोषी ठहराया गया था, उन्हें अधिकतम 7 साल कैद की सजा हो सकती थी।
लेकिन उनके वकील ने उन्हें ज्यादा सजा से बचाने के लिए उनकी सेहत का हवाला
दिया था। उनके वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि रशीद बहुत बीमार है। उन्हें
दिल की बीमारी और डायबिटीज की समस्या है। ऐसे में उनकी सजा पर विचार किया
जाए। गौरतलब है कि मसूद पर देश के अलग अलग मेडिकल कॉलेजों में फर्जी तरीके
से एडमिशन कराने का आरोप है। 1989 और 1990 के दौरान हुए इस फर्जीवाड़े में
रशीद मसूद को भ्रष्टाचार की अलग अलग धाराओं में दोषी पाया गया था। इस
फर्जीवाड़े में त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री एस आर मजूमदार, पूर्व
स्वास्थ्य मंत्री कांशी राम रेयान, आईएएस एके रे और आईपीएस गुरूदयाल भी
शामिल थे। जिसमें से मजूमदार और रेयान की मौत हो चुकी है।
