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उत्तर बिहार में बादल फटने जैसी स्थिति का पूर्वानुमान

बिहार के मुख्य सचिव एके सिन्हा ने भारतीय मौसम विज्ञान के हवाले से कहा कि सितंबर के दूसरे सप्ताह में उत्तर बिहार में 'हैवी रेन फाल' की भविष्यवाणी की गई है। यानी
बादल फटने जैसी स्थिति । 24 घंटे में 300 एमएम (मिलीमीटर) बारिश। जाहिर है इसका असर गंगा पर भी पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि इस संभावना को ले सभी जिलों को अलर्ट कर दिया गया है। केंद्र से एनडीआरएफ की अतिरिक्त टुकड़ी मांगी गई है। मुख्य सचिव, बुधवार को बाढ़ व राहत के हालात की समीक्षा करने के बाद संवाददाताओं से बात कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि पटना में गंगा के जलस्तर में थोड़ी कमी आई है मगर सितंबर तक निश्चिंत नहीं रह सकते। 1975 में पटना में बाढ़ के अनुभव को देखते हुए पूरी तैयारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घबराने की जरूरत नहीं है। पूरी तैयारी है। पटना डीएम को निर्देश देकर आकस्मिक योजना तैयार कर ली गई है।
तटबंधों पर नदियों का दवाब : नदियां, तटबंधों पर दबाव बनाए हुए हैं। गंगा नदी के जलस्तर में बुधवार को 6 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, गुरुवार को 16 सेंटीमीटर की कमी होने की संभावना है। भागलपुर में गंगा नदी का जलस्तर स्थिर बना हुआ है। खगड़िया में टूटे हुए तटबंध को दुरूस्त कर लिया गया है। जल संसाधन विभाग हालात पर नजर बनाए हुए है।
जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने नेपाल में अत्याधिक वर्षा एवं गंगा के जलस्तर में हुई वृद्धि से उत्पन्न स्थिति की बुधवार को समीक्षा की। समीक्षा बैठक में विभाग के प्रधान सचिव भी मौजूद थे। सिंह ने पुनपुन नदी के बाएं तट पर स्थित तटबंध का भी निरीक्षण किया। उन्होंने पहाड़ी नाला, खनुआ नाला एवं बादशाही नाला के जल निकासी के लिए पुनपुन तटबंध पर निर्मित एन्टी-फ्लड स्लूस को कार्यशील रखने के लिए स्थल पर उपस्थित अधीक्षण अभियंता को आवश्यक निर्देश भी दिया।
चौधरी ने बताया कि गंगा नदी के जलस्तर में गांधीघाट में 6 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है। गंगा नदी के जलस्तर में बक्सर से लेकर पटना तक कमी हो रही है। भागलपुर में गंगा का जलस्तर बुधवार को 30.50 मीटर दर्ज किया गया जो इस मानसून अवधि का सर्वाधिक है। खगड़िया के परबत्ता प्रखंड स्थित गोगरी नारायणपुर तटबंध मंगलवार को करीब 10 किमी की लंबाई में टूट गया था, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों तथा जिला प्रशासन के सहयोग से विभागीय अभियंताओं द्वारा इसे बचा लिया गया है। बांध के पुनस्र्थापन एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य विभाग के द्वारा भेजे गए अभियंता प्रमुख(उत्तर) राजेश्वर दयाल की देखरेख में युद्धस्तर पर कराया जा रहा है। मंत्री ने क्षेत्रीय अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिया है कि बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराकर हर हाल में तटबंध को सुरक्षित रखें।
घर छोड़ नहीं आ रहे शिविर में
प्रधान सचिव आपदा प्रबंधन व्यास जी ने राघोपुर और दानापुर के दियारा इलाके का नाव से भ्रमण किया। उनके अनुसार लोग पानी से घिरे हैं मगर घर छोड़कर शिविर में नहीं जा रहे। उनको घर के सामान चोरी जाने का डर है। उन्होंने निर्देश दिया है कि जो लोग अपने घरों में शरण लिए हुए हैं, नाव की मदद से उन्हें वहां ही खाद्य सामग्री पहुंचाई जाए।