दिल्ली के साकेत कोर्ट ने गैंगरेप के चारो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है. पूरे देश में इस फैसले का स्वागत किया जाने लगा है. अदालत ने इस फैसले को रेयरेस्ट ऑफ द् रेयर करार देते हुए कहा कि इन दोषियों के साथ किसी प्रकार की रियायत नहीं बरती जा सकती.
अदालत ने अपने फैसले में कहा, "मौजूदा समय में जब महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं हम ऐसे खौफनाक अपराध से आंख नहीं मूंद सकते. ऐसी घटनाएं बर्दाशत नहीं की जा सकती."
16 दिसंबर को घटे उस दरिंदगी ने आधी आबादी को ही नहीं पूरे मानवता को झकझोर दिया था. आज सुनाए गए इस फैसले पर पूरे देश और दुनिया की निगाहें लगी हुई थीं. आम से खास तक सबका कहना है कि अदालत का यह फैसला एक नजीर साबित होगा.
फास्ट टै्रक कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना ने दोपहर ढाई बजे अपना फैसला सुनाया. अभियोजन पक्ष इस मामले को दुर्लभ अपराध बताते हुए सजा-ए-मौत की मांग कर रहा था, जबकि बचाव पक्ष ने दोषियों को सुधार का एक मौका देने की अपील की थी.
इससे पहले साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना ने बुधवार को सजा पर बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. अदालत ने मंगलवार को चारों आरोपियों को हत्या और गैंगरेप जैसे संगीन आरोपों में दोषी ठहराया गया था. दोषियों को अधिकतम फांसी की सजा दी गई है.
अभियोजन पक्ष ने सभी आरोपियों के लिए मौत की सजा मांगी थी.
अभियोजन पक्ष ने सभी आरोपियों के लिए मौत की सजा मांगी थी.
हत्या के दोषी
साकेत कोर्ट ने इस मामले के चार आरोपियों, मुकेश, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर को दोषी ठहराया.
फैसले की अहम बात यह रही है कि कोर्ट ने आरोपी विनय को भी दोषी माना है जिसकी ओर से मौके पर नहीं होने का दावा किया जा रहा था.
चारों आरोपियों पर अन्य आरोपों के साथ-साथ गैंगरेप, हत्या, हत्या का प्रयास, अप्राकृतिक अपराध, सुबूतों को नष्ट किए जाने और लूट के मामले दर्ज थे और अदालत ने इस भी मामलों में उन्हें दोषी पाया. अदालत ने सभी आरोपियों को ताज़ीरात-ए-हिंद की दफा 302, 376(2जी) 377, 307, 365, 366, 396, 395, 397, 412, 201, 120 बी और 34 के तहत दोषी पाया.
ग़ौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले साल 16 दिसंबर को चलती बस में एक युवती के साथ गैंगरेप की घटना घटी थी. इस घटना के छह आरोपियों में से 4 आरोपियों पर फैसला आया.
मामले में कुल पांच व्यक्ति आरोपित थे, लेकिन मुख्य आरोपी राम सिंह ने सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी.
एक आरोपी ने केस की सुनावाई के दौरान जेल में खुदकुशी कर ली थी, जबकि एक नाबालिग आरोपी को जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड तीन साल की सजा दे चुका है.
याद रहे कि इस बर्बर घटना के बाद फैले व्यापक जनाक्रोश के कारण केंद्र सरकार को सख्त एंटी रेप कानून बनाना पड़ा था.
इस मामले में आरोपी नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड ने 31 अगस्त को तीन वर्ष किशोर सुधार गृह में बिताने की सजा सुनाई. हालांकि नाबालिग के खिलाफ न्यायालय के फैसले पर पीड़ित के परिवार वालों ने नाराजगी जाहिर की थी और नाबालिग को और सख्त सजा दिए जाने की इच्छा जाहिर की थी.
अदालती सुनवाई
इस मामले में तीन जनवरी को आरोपपत्र दाखिल हुआ और पांच फरवरी को सुनवाई शुरू हुई. अभियोजन पक्ष ने 85 गवाह पेश किए जबकि बचाव पक्ष के 17 गवाहों के बयान लिए गए.
पुलिस ने अपने आरोपपत्र में कहा था कि घटना में नाबालिग ने पीड़ित के साथ सबसे अधिक बर्बरता वाला व्यवहार किया था.
क्या हुआ था 16 दिसंबर को
16 दिसंबर 2012 को दिल्ली के मुनिरका में चलती बस में गैंगरेप की वारदात हुई थी. आरोपियों ने पीड़ित को उसके दोस्त के साथ पहले बस में बैठाया था. बाद में गैंगरेप के बाद दोनों को बस से फेंक दिया था.
पीड़ित लड़की का पहले सफदरजंग अस्पताल में इलाज किया गया. घटना के 13 दिन बाद सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में पीड़ित की उपचार के दौरान मौत हो गई थी.
दिल्ली गैंगरेप के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुआ था. देश के गुस्से को देखते हुए सरकार ने यौन अपराधों से निपटने के लिए जस्टिस वर्मा कमेटी का गठन किया. वर्मा कमेटी की ज्यादातर सिफारिशों को स्वीकार करते हुए सरकार ने क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट 2013 बनाया, जिस पर 2 अप्रैल को राष्ट्रपति की मुहर लगी.