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तेलंगाना पर सियासत तेज, CM ने सौंपा इस्तीफा

अलग तेलंगाना के मुद्दे पर कांग्रेस अब यूपीए में शामिल दलों से राय लेने वाली है। तेजी से बढ़ते घटनाक्रम के बीच आंध्र प्रदेश में इस्तीफों की सियासत भी तेज हो गई है।
सूत्रों की मानें तो खुद मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी राज्य के बंटवारे का विरोध करते हुए अपना इस्तीफा कांग्रेस आलाकमान को सौंप चुके हैं। लेकिन विपक्ष इसे कांग्रेस की सियासी तिकड़म करार दे रहा है।
तेलंगाना के फेर में फंसे राजनीतिक दलों को रास्ता नहीं सूझ रहा। मुश्किल ये कि सूबे की हर पार्टी तेलंगाना में तो खुद तो अलग राज्य का समर्थक दिखाना चाहती है, लेकिन बाकी हिस्से में तेलंगाना विरोधी। सीमांध्र इलाके में चित्तूर जिले से आने वाले मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी भी खुद को संयुक्त आंध्र प्रदेश के समर्थक के तौर पर पेश करते आ रहे हैं। अब तेलंगाना विरोधियों को ये संदेश दिया जा रहा है कि अगर राज्य का बंटवारा हुआ तो रेड्डी इस्तीफा दे देंगे। सूत्रों की मानें तो रेड्डी अपना ये इरादा कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक में आलाकमान को जता चुके हैं। रेड्डी का रुख देख सीमांध्र के कांग्रेसी मंत्री भी इस्तीफे का राग अलापने लगे हैं।
कांग्रेस नेता टीजी वेंकटेश का कहना है कि हम लोग पार्टी नहीं छोड़ेंगे। लेकिन हम लोग सभी रास्तों को खुला रखा है। हम लोग आपस में चर्चा करेंगे और इस मुद्दे पर हम सभी कुछ करेंगे।
तेलंगाना के मुद्दे पर जगन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के 16 विधायक पहले ही विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा दे चुके हैं। उनकी मांग है कि कांग्रेस तेलंगाना पर अपनी स्थिति साफ करे। लेकिन टीडीपी ने इस मसले पर चुप्पी साध ली है। पंचायत चुनाव में तेलंगाना में बेहतर प्रदर्शन करने वाले टीडीपी अध्यक्ष चंद्र बाबू नायडू कुछ भी बोलने को तैयार नहीं। सभी को कांग्रेस के फैसले का इंतजार है। कांग्रेस 31 जुलाई को इस मसले पर यूपीए के बाकी सहयोगी दलों से राय लेने वाली है। पार्टी का कहना है कि अंतिम फैसला वर्किंग कमेटी में ही होगा।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस तेलंगाना में रायलसीमा के दो जिले करनूल और अनंतपुर को मिलाकर रायल तेलंगाना बनाना चाहती है। इससे प्रस्तावित तेलंगाना राज्य में टीआरएस का प्रभाव कम हो जाएगा।