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गैंगरेप पीड़िता से मिलने की हिम्मत नहीं जुटा पाई शीला दीक्षित

दिल्ली की मुख्यमंत्री चलती बस में गैंगरेप की शिकार हुई पीड़िता से मिलने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं। वह इतनी हिम्मत भी नहीं जुटा पा रही हैं कि इस मुद्दे पर अपने परिवार और दिल्ली को जवाब दे सकें। शुक्रवार को अपने दर्द की दास्तां उन्होंने कुछ ऐसे ही शब्दों में एक
निजी चैनल से हुई मुलाकात में बयां की। इस मुलाकात में पीड़िता की हालत बयां करते समय वह भावुक हो पड़ीं। इससे पहले जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उस लड़की से मिलने अस्पताल गई थीं तो उनकी भी आंखें उसको देखकर भर आर्ई थीं और वह वापसी में किसी को कुछ जवाब नहीं दे सकीं थी। ऐसा ही कुछ मंजर शीला दीक्षित की बातों में भी दिखाई दिया।
इस बातचीत में उन्होंने कहा कि वह गैंगरेप पीड़िता का हाल जानने के लिए अस्पताल गई थीं लेकिन वह उस बच्ची से मिलने और उसका सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं। उन्होंने कहा कि इस घटना ने उन्हें अंदर तक बुरी तरह से झकझोड़ कर रख दिया है। वह इस घटना से पूरी तरह से हिल गई हैं। आज के समाज में इतनी बर्बरता किसी के लिए भी बर्दाश्त के बाहर है। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने जहां पीड़िता के हौंसलों को तारीफ की वहीं उसके मां और पिता की तारीफ भी करी। उन्होंने कहा कि इस घिनौने कृत्य से जहां पूरे भारत में रोष है वहीं उस लड़की के माता पिता को सिर्फ अपनी बच्ची के ठीक होने का इंतजार है।
शीला दीक्षित ने इस बातचीत में जहां लड़की से हुए इस घिनौने कृत्य की कड़ी आलोचना की वहीं उन्होंने पुलिस के काम पर भी सवालिया निशान लगाए। उन्होंने कहा कि आज भी पुलिस की ट्रेनिंग अंग्रेजों के समय की है जब आबादी कम थी और लोगों का पलायन न के ही बराबर होता था। पुलिस की मानसिकता में भी परिवर्तन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पुलिस में संवेदनशीलता की बेहद कमी है जो निंदनीय है। वह किसी महिला के साथ हुई बदसलूकी और छेड़खानी की घटना को बेहद हल्के से लेती है।
इस बातचीत में उन्होंने दिल्ली पुलिस समेत कुछ और विभाग को दिल्ली सरकार को सौंपे जाने की पुरजोर वकालत भी की। उन्होंने कहा कि यदि आज वह मुख्यमंत्री नहीं होती तो वह भी आज वही सब करती जो बाकि लोग कर रहे हैं। दीक्षित ने कहा कि इस घटना से लोगों में बेहद आक्रोश है वह आज सड़कों पर हैं और दिल्ली सरकार से उम्मीद रखे हैं कि हम इस अपराध को करने वाले सभी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाएंगे। लेकिन क्योंकि हमारे हाथों में दिल्ली पुलिस नहीं है वह केंद्र के पास है तो हमारे हाथ कहीं न कहीं बंधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह सही है कि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सिर्फ गिरफ्तार करने भर से ही कुछ नहीं होता है। इसके लिए जरूरत है कि इस केस का निपटारा दस, पंद्रह और बीस दिनों में हो जाए और दोषियों को सजा मिले। ऐसी ही उम्मीद दिल्ली और पूरे भारत की जनता हमसे लगाए हुए है।
शीला दीक्षित ने इस हादसे से जुड़ी कुछ और बातों को भी इस बातचीत का हिस्सा बनाया। इस दौरान उन्होंने देश की न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश की न्यायिक प्रक्रिया को और मजबूत होने की जरूरत है। इस तरह के मामलों को जरूरी नहीं है कि चरणबद्ध तरीके से पहले सेशन कोर्ट फिर हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में जाने का मौका दिया जाए और उसके बाद भी उसको राष्ट्रपति के पास दया याचिका डालने की इजाजत दी जाए। इस तरह के घिनौने कृत्य के लिए दस पंद्रह दिन में सजा देकर देश और दुनिया को यह संदेश देना चाहिए कि यदि फिर किसी ने ऐसा काम किया तो उसकी खैर नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि इस घटना के बाद वह दिल्ली की सड़कों पर उतरी छात्राओं और महिलाओं को क्या कहना चाहती हैं, उन्होंने कहा कि यदि वह मुख्यमंत्री नहीं होती तो वह भी दूसरी छात्राओं की तरह से सड़कों पर प्रदर्शन में शामिल होती। उन्होंने कहा कि आज जो जन आक्रोश इस घटना के बाद लोगों के मन में फैला है वह उसकी इज्जत करती हैं और यह सही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में न सिर्फ देश के कोने कोने से लोग आते हैं बल्कि दुनिया के दूसरे मुल्कों से भी यहां लोग आते हैं। ऐसे में इस घटना ने देश पर एक काला धब्बा लगा दिया है, लोग हमसे उम्मीद लगाए बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि लोगों ने हमें यहां पर चुनकर भेजा है इस उम्मीद में कि हम कुछ करेंगे। आमजन केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाने या फिर केंद्र के आला अधिकारियों तक पहुंच नहीं रखपाता है, लिहाजा वह हमसे आस लगाता है। दीक्षित ने कहा कि आज जब लोग सड़कों पर हैं और वह बच्ची जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है ऐसे में हम सभी यह चाहते हैं कि इस मामले का निपटारा फास्ट ट्रेक कोर्ट के माध्यम से जल्द हो और इसमें आरोपियों को आगे याचिका करने का अवसर नहीं मिलना चाहिए।
यह पूछे जाने पर कि एक महिला होने के नाते वह क्या सोचती हैं तो उनका कहना था कि वह इस घटना से वह दहल गई हैं। वह अपने परिवार के बीच इस बात को नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके दो पोती हैं और वह इस मुद्दे पर उनके सवालों का जवाब देने से भी कतरा रही हैं। लिहाजा वह उन्हें टीवी भी नहीं देखने दे रही हैं क्योंकि वह नहीं चाहती हैं कि उनके मन में किसी तरह की कोई दहशत बैठ जाए। इसकी एक वजह उन्होंने यह भी बताई कि वह इस मुद्दे पर उनके भी सवालों को जवाब नहीं दे सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद पीड़िता की जिंदगी पूरी तरह से तबाह हो गई है। उसकी आंतें और गर्भाशय निकाल दिया गया है। उसकी पीठ में भी काफी तकलीफ है। उन्होंने यह बात साफतौर पर कही है कि लड़की को सही करने के लिए उन्हें दुनिया के किसी भी देश में जाना पड़े वह पीछे नहीं हटेंगी। वह पीड़िता की हालत को लेकर लगातार डाक्टरों से संपर्क बनाए हुए हैं। दीक्षित ने कहा है कि उन्होंने इस बाबत डाक्टरों को साफतौर पर कहा है कि जब कभी भी ऐसी जरूरत हो कि विदेशी डाक्टरों को बुलाने या लड़की को इलाज के लिए विदेश भेजने की जरूरत हो तो वह इसकी सूचना तुरंत उन्हें दें, वह इसमें कोई देर नहीं करना चाहेंगी। शीला दीक्षित ने पीड़िता के माता-पिता को भरोसा दिलाया है कि दिल्ली सरकार उसके इलाज का पूरा खर्च उठाएगी और उनके परिवार की हर संभव मदद भी करेगी। उन्होंने कहा कि यह लड़की उनकी उम्मीद थी लेकिन इस हादसे ने उन्हें तोड़कर रख दिया है।