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जीवन में मीठा जहर घोल रहा है पानी

भागलपुर जिले के गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में दूषित पेयजल इंसानों के जीवन में मीठा जहर घोल रहा है। क्षेत्र में आर्सेनिक व फ्लोराइड का प्रकोप इस कदर बढ़ा है कि लोग पेट सहित अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं ।
इस समस्या के निदान को पीएचइडी विभाग द्वारा कई पंचायतों में योजनाएं शुरू की गई, लेकिन वह सफलता नहीं पा सकी। ऐसी ही समस्या नाथनगर प्रखंड के शंकरपुर चौवनियां पंचायत की है। यहां की छह हजार आबादी आर्सेनिक व फ्लोराइड की समस्या से जूझ रही है। यहां के ग्रामीण आर्सेनिक व फ्लोराइड युक्त पानी के सेवन से पेट की बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं । पीला पानी निकलने से कपड़े का रंग भी पीला पड़ रहा है। इतना ही नहीं मीठे जहर का असर भोजन के सहारे लोगों के पेट में जा रहा है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह है। योजनाओं के बावजूद शंकरपुर के लोग विवशता में दूषित पानी पीने को विवश हैं।
पीएचइडी विभाग द्वारा पूर्व में आंगनबाड़ी केंद्र दारापुर, बिंदटोली व बालू टोला में चापाकल में फिल्टर लगाए गए। लेकिन इससे भी दूषित पानी निकल रहा है। मुखिया जगदीश मंडल ने बताया कि तीन मोहल्ले में फ्लोराइड, आर्सेनिक के साथ लौह तत्व का अत्यधिक प्रभाव है। 60 फीसद ग्रामीणों में पेट संबंधी, गैस व विकलांगता की शिकायतें हैं। बिंदटोली में 12 वर्ष तक के दर्जन भर बच्चे विकलांग हो चुके हैं। इसका प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर भी पड़ रहा है।
पीएचइडी विभाग द्वारा एक वर्ष पूर्व आर्सेनिक व फ्लोराइड युक्त जल को स्वच्छ करने की योजना बनाई गई। इसके लिए पंचायत में सोलर लाइट से संचालित बोरिंग का निर्माण किया जाना था, लेकिन विभाग की ये योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। गोसाइदासपुर, राघोपुर व बैरिया में सोलर संचालित बोरिंग का निर्माण कराया गया, लेकिन यह कारगर साबित नहीं हुई।