असम में बाढ़ की स्थिति विकराल बनी हुई है। बाढ़ग्रस्त 16 जिलों में सोमवार को कुछ और इलाके डूब गए। राज्य में लगभग 10 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सूत्रों ने बताया कि 1,604 गांवों में पानी घुस गया है। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने बेसहारा लोगों के लिए 169 राहत शिविर लगाए हैं। इन शिविर में करीब डेढ़ लाख ठहरे हुए हैं।
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सूत्रों ने बताया कि 1,604 गांवों में पानी घुस गया है। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने बेसहारा लोगों के लिए 169 राहत शिविर लगाए हैं। इन शिविर में करीब डेढ़ लाख ठहरे हुए हैं।
प्राधिकरण के सूत्रों ने बाढ़ से चार लोगों के मरने की पुष्टि की है। डिब्रूगढ़ में एक और तिनसुकिया में तीन लोगों की मौत हुई है। अनाधिकारिक सूत्रों का हालांकि कहना है कि मरने वालों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। सूत्रों ने कहा कि कई लोगों के लापता होने की खबर है, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
ब्रह्मपुत्र और उसकी कुछ सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और जलस्तर का बढ़ना जारी है। माजुली द्वीप में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। जलस्तर बढ़ने के कारण मंगलवार से सभी शैक्षिक संस्थाओं को अनिश्चितकाल तक बंद कर दिया गया है।वायुसेना, थलसेना, राष्ट्रीय आपदा उत्तरदायी बल तथा राज्य आपदा उत्तरदायी बल राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं। तिनसुकिया, सोनितपुर और धेमाजी जिलों में शनिवार शाम तक लगभग 8,000 लोगों को डूबने से बचा लिया गया है।
वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने सोनितपुर के सूटी और तिनसुकिया जिले के सादिया में रविवार देर शाम तक बेसहारा लोगों के बीच 250 क्विंटल खाद्य समग्रियों के पैकेट गिराए। बाढ़ से फसलें बर्बाद हो गई हैं और कई स्थानों पर मत्स्य उद्योग को नुकसान पहुंचा है।
सूत्रों ने बताया कि डिब्रूगढ़-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान का एक बड़ा हिस्सा, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान तथा पोबितारा वन्यजीव अभयारण्य डूब गए हैं। बढ़ते जलस्तर ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में लगाए गए अवैध शिकार विरोधी 100 शिविरों को भी अपनी चपेट में ले लिया है।