इससे भी ज्यादा विषम परिस्थिति तब उत्पन्न हो जाती है जब किसी भद्र महिला को लघुशंका की इच्छा हो जाती है। इस स्टेशन पर फिलहाल कोई सुविधा खोजने पर नहीं मिलती। लाचारीवश किसी रेलकर्मी के क्वार्टर की खोज करनी पड़ती है। उस वक्त लोग कहते है कि मैं तो बेघर हूं। अपने घर ले चलो। घर में हो मुश्किल तो दफ्तर ले चलो। आखिरकार जब कोई परिचित रेल कर्मी नहीं मिलता है तब स्टेशन मास्टर का दफ्तर ही काम आता है।
क्या कहते है यात्रीगण
नवगछिया स्टेशन से दैनिक यात्रा करने वाले पंकज कुमार, विपिन कुमार, दिनेश कुमार, भूषण प्रसाद सिंह, राजा हुसैन सरीखे दर्जनों यात्रियों को कहना है कि आखिरकार कब तक होता रहेगा यहां निर्माण। अब तक यहां बनने वाले उच्च श्रेणी प्रतीक्षालय, द्वितीय श्रेणी प्रतीक्षालय, यात्री विश्रामालय, मुसाफिर खाना की समय सीमा तय क्यों नहीं हो रही है। एक तरफ रेल के पास किसी चीज की कमी नहीं है तो दूसरी तरफ नवगछिया स्टेशन के निर्माण में इतना विलंब क्यों लग रहा है।
क्या कहते है अधिकारी
नवगछिया मॉडल स्टेशन पर यात्रियों को हो रही दिक्कत के मामले में अधिकारियों का कहना है कि हर अधिकारियों के पास काम की अधिकता है। निर्माण करा रहे ठेकदार के द्वारा भी कई जगहों के काम चलाए जा रहे है। यहां का विश्रामालय एवं उच्च श्रेणी प्रतीक्षालय जल्द ही चालू होने की संभावना है। द्वितीय श्रेणी के प्रतीक्षालय का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। यात्री शेड का विस्तार भी जल्द प्रारंभ कर दिया जाएगा। इसके साथ ही कई अन्य सुविधाएं भी इस स्टेशन पर यात्रियों को जल्द ही मिलने वाली है।