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गंगा तेरा जल नहीं रहा अमृत

आर्सेनिक, फ्लोराइड तथा भारी अवयव इत्यादि कई अशुद्धियां है गंगा तटीय क्षेत्रों के पानी में। जबकि एक भी पदार्थ की अधिकता शरीर को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है। यहां तो कई प्रकार के पदार्थ जल में मौजूद हैं। इसलिए गंगा नदी के पानी की क्वालिटी पर अब प्रश्न चिह्न लग गया है। पानी की हर एक बूंद में जिन्दगी होती है लेकिन गंगा तेरा पानी अमृत अब नहीं रहा। इसमें तो लम्बी यात्रा के दौरान काफी मात्रा में आर्सेनिक, फ्लोराइड इत्यादि कई प्रकार के हानिकारक पदार्थ मिल जाते हैं, जो हानिकारक साबित हो रहे हैं। उपरोक्त बातें तिलकामांझी भागलपुर विश्र्वविद्यालय के छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. आरपी उपाध्याय ने मंगलवार को नवगछिया स्थित गजाधर भगत महाविद्यालय के सभा कक्ष में गंगा के तटीय क्षेत्रों के जल में आर्सेनिक, फ्लोराइड तथा भारी अवयव की अधिकता से उत्पन्न समस्या पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में बोल रहे थे। इस सेमिनार का उद्घाटन तिलकामांझी भागलपुर विश्र्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डा. ध्रुव कुमार एवं गजाधर भगत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डा. अरुण कुमार मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया। इससे पूर्व श्रेया प्रिया, मुस्कान, साईन प्रवीण, स्वीटी उर्वशी और लूसी द्वारा विश्वविद्यालय के कुल गीत एवं अभिनन्दन गीत प्रस्तुत किया। इस दौरान सेमिनार के आयोजक सचिव अशोक कुमार झा ने देश भर के विभिन्न क्षेत्रों से आये लगभग डेढ़ सौ रसायन के विद्वान एवं वैज्ञानिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस सेमिनार में कल्याणी विश्र्वविद्यालय, विश्र्व भारती, शांति निकेतन, एसपी कालेज दुमका, साहेबगंज महाविद्यालय, इलाहाबाद विश्र्व विद्यालय, भागलपुर विश्र्वविद्यालय के रसायन शास्त्री एवं वैज्ञानिकों के अलावे रांची के युवा वैज्ञानिक भी शामिल हुए। सेमिनार के प्रथम सत्र में डीसी मुखर्जी, बी मिश्रा, मथुरा दूबे एवं आरपी उपाध्याय के मुख्य व्याख्यान हुए। द्वितीय सत्र में महेश्र्वर साह एवं भावतोष मंडल के व्याख्यान हुए। इस दौरान संगीत कला महाविद्यालय के सौजन्य से लाभी डाभी पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा कई आकर्षक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गये। इस मौके पर मौजूद पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता संजय दुबे ने आर्सेनिक हटाने के प्रयास की बात कही।