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सोमवार, 2 जनवरी 2017

जानिये! भारत में कितनी बार मनाया जाता है नववर्ष

नईदिल्ली। हर देश में 1 जनवरी को नया साल मनाया जाता है। जहाँ एक तरफ पूरा देश केवल एक बार ही नये साल का जश्र मनाता है वही दूसरी तरफ भारत में
पूरे साल ही नये साल का जश्र मनाया जाता है। भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ पूरे साल नया साल मनाया जाता है। चलिए आज आपको बताते है कि भारत में कैसे पूरे साल नया साल मनाया जाता है।
हिंदू धर्म का  नववर्ष- हिन्दू धर्म में नया साल हिन्दी पंचांग के मुताबिकचैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है। यानि इस बार हिंदू समाज के अनुसार 28 मार्च को होगा नए साल का स्वागत। एक साल में 12 महीने और 7 दिन का सप्ताह विक्रम संवत से ही प्रारंभ हुआ है। इस समय विक्रम संवत 2068-69 चल रहा है।
मुस्लिम धर्म का  नववर्ष- मुसलमानो में नया साल में नया साल मोहर्रम की पहली तारीख से माना जाता है। मुहर्रम इस्लामी वर्ष यानी हिजरी सन का पहला महीना होता है।
 मलयाली धर्म का नववर्ष- मलयाली समाज में नया वर्ष ओणम से मनाया जाता है। ओणम अगस्त और सितंबर के बीच मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन राजा बली अपनी प्रजा से मिलने के लिए पृश्वी पर आते हैं।
तमिल धर्म का नववर्ष- तमिल नववर्ष पोंगल से शुरू होता है। पोंगल हर साल 14-15 जनवरी को मनाया जाता है। यह त्यौहार नई फसल के आने की खुशी में मनाया जाता है। पोंगल में सूर्य देव को प्रसाद चढ़ाया जाता है।
महाराष्ट्र धर्म का नववर्ष- महाराष्ट्री समाज चैत्र माह की प्रतिपदा को ही नववर्ष मनाता है। इस दिन बांस को नई साड़ी पहनाकर उस पर तांबे या पीतल के लोटे को रखकर गुड़ी बनाई जाती है। परिवार की संपन्नता के लिए गुड़ी को घर के बाहर लगाया जाता है।
पंजाबी धर्म का नववर्ष- पंजाबी लोग बैसाखी से अपना नया साल मानते हैं। बैसाखी हर साल 13-14 अप्रैल को मनाई जाती है। यह त्यौहार नई फसल आने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन नए कपड़े पहनकर भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है।
पारसियों धर्म का नववर्ष- 19 अगस्त को मनाया जाने वाले पारसी नवर्ष को नवरोज कहा जाता है। इसी दिन फारस के राजा जमशेद ने सिंहासन ग्रहण किया था। जमशेद ने ही पारसी कैलेंडर बनाया था।
जैन धर्म का नववर्ष- जैन समुदाय में दीवाली के दिन नये साल का आगाज़ होता है। इसे वीर निर्वाण संवत कहा जाता है।
गुजराती धर्म का नववर्ष- दीपावली के दूसरे दिन पड़ने वाली परीवा को गुजराती लोग नया साल मनाते हैं। गुजराती पंचांग भी विक्रम संवत पर आधारित है।
बंगाली नववर्ष- बैसाख की पहली तारीख को बंगाली समुदाय नववर्ष का स्वागत करता है। इस दिन नई फसल की कटाई का जश्न मनाया जाता है और व्यापारी लोग नया बही खाता शुरू करते हैं।
इस सब के बाद भी भारत में अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सभी समुदाय के लोग 1 जनवरी को भी नए साल का जश्न मना लेते हैं।और लोग बड़े ही आनंद के साथ इस दिन मजे लेते है।

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