इस मौके पर एसीएमओ ने रात्रि में ड्यूटी कर रही महिला स्वास्थ्यकर्मी से भी पूछताछ की। इसके बाद महिला वार्ड का भी निरीक्षण किया।
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार इस तरह की जांच हुई है। हर बार मामले की लीपा पोती हो जाती है। अथवा वरीय अधिकारी भी मैनेज हो जाते हैं। इस बार भी शायद यही होने वाला है। लेकिन कुछेक लोगों को आयुक्त मिनहाज आलम पर भरोसा है।
बताते चलें कि इस अस्पताल में प्रसव पीड़ित महिलाओं के साथ वर्षों से अमानवीय व्यवहार जारी है। जो अक्सर रात में ही किया जाता है। कारण कि इस तरह के रोगियों के साथ सिर्फ महिला सहयोगी को ही अस्पताल में रहने दिया जाता है। पुरुष सहयोगी को रात में रहने नहीं दिया जाता है। जहां लगभग देर शाम या आधी रात में प्रसव पीड़ित महिला को या उसकी सहयोगी को इमरजेंसी स्थिति समझा कर भयादोहन किया जाता है। अन्यथा उसे रेफर के बहाने अस्पताल से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
