पटना सीरियल
धमाकों को लेकर सियासत तेज हो गई है। रविवार को मोदी की रैली से ठीक पहले
हुए धमाकों को लेकर बीजेपी ने नीतीश सरकार पर जोरदार हमला किया है। बीजेपी
नेता अरुण जेटली ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि पटना के गांधी मैदान में
नरेंद्र मोदी की रैली के लिए सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी थे। जेटली के
मुताबिक इतनी बड़ी रैली थी लेकिन पुलिस का कोई भी बड़ा अधिकारी मौके पर मौजूद
नहीं था।
जेटली
ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक चूक का इससे बड़ा सबूत नहीं हो सकता। क्योंकि
इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए लिए गांधी मैदान पर कोई बड़ा सुरक्षा
एक्सपर्ट नहीं था। जेटली ने कहा कि कोई भी बड़ा पुलिस अधिकारी बीजेपी के
नेताओं से नहीं मिला।
जेटली
के मुताबिक केंद्र की ओर से पहले से अलर्ट होने के बावजूद सुरक्षा में
इतनी बड़ी कोताही बरती गई। उन्होंने कहा कि खुशकिस्मती इस बात की रही कि
विस्फोट भीड़ में नहीं हुआ नहीं तो जानमाल का और भी बड़ा नुकसान हो सकता था।
ब्लास्ट पर हो रही सियासत के बीच इन धमाकों पर कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे
हैं। अरुण जेटली ने बिहार सरकार पर कई सवाल उठाए। वो सवाल ये हैं-
नीतीश सरकार ने गृह मंत्रालय के अलर्ट के बाद भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?
मोदी
पर हमले का अलर्ट 23 सितंबर को ही सभी राज्यों को दिया गया था। सरकार क्या
अपनी नाकामी छिपाने के लिए अलर्ट की बात से इनकार कर रही है?
धमाके के बाद आज भी जिंदा बम मिले, तो रविवार को पुलिस ने कैसे तलाशी ली थी?
आतंकी गांधी मैदान तक बम ले जाने में कैसे कामयाब हुए?
गांधी मैदान के पास बम निरोधक दस्ता क्यों नहीं तैनात था?
गांधी मैदान के किसी गेट पर मेटल डिटेक्टर क्यों नहीं था?
बोरा और झोला लेकर पहुंच रहे लोगों की तलाशी क्यों नहीं ली जा रही थी?
राज्य का खुफिया विभाग क्या कर रहा था?
पहला बम फटने के बाद भी पुलिस हरकत में क्यों नहीं आई?
