ताजा समाचार :

6/Posts/ticker posts

नवगछिया में आ सकती है उत्तराखंड जैसी स्थिति यानि जल प्रलय

बिहार सरकार एवं इसके जल संसाधन विभाग द्वारा नवगछिया में कराये जा रहे बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य
काफी कमजोर और सिर्फ लोक दिखावा साबित हो रहे हैं | गोपालपुर से इस्माइलपुर तक बनाया गया है सुरक्षात्मक बांध | साथ ही इसकी सुरक्षा के लिए बनाए गए है कई स्पर | ये सभी स्पर एक एक करके ध्वस्त होते जा रहे हैं | इसके बाद अब गंगा का दबाव मुख्य बांध पर भी पड़ने लगा है | यदि गंगा के दबाव और कटाव को स्परों की तरह मुख्य बांध भी नहीं झेल पाया तो सरकार और विभाग की कलई तो खुलेगी ही | साथ ही नवगछिया की स्थिति को भी उत्तराखंड जैसी स्थिति बनने से कोई रोक नहीं सकता |
जानकारी के अनुसार 3 अगस्त 2013 शनिवार को स्पर संख्या सात डेढ. सौ मीटर तक ध्वस्त हो गया था | इसके बाद स्पर नंबर पांच के अपस्ट्रीम में 4 अगस्त रविवार की देर शाम 50 मीटर धंसान हो गया |  धंसान इतनी तेजी से हुआ कि मौके पर मौजूद अभियंता और ठेकेदार कुछ समझ पाते कि 50 मीटर तक स्पर पूरी तरह से गंगा नदी में विलीन हो गया.
बताते चलें कि नवगछिया पुलिस जिला अंतर्गत गोपालपुर के बिंद टोली से लेकर इस्माइलपुर तक बने इस तटबंध की कुल लंबाई आठ किलोमीटर है. नवनिर्मित दो स्परों सहित कुल 11 स्पर इस तटबंध पर हैं. स्पर संख्या एक को जल संसाधन विभाग स्पर मानने को तैयार नहीं है. क्योंकि इसे तटबंध से जोड़ा जो नहीं गया है. वहीं स्पर संख्या आठ और नौ पिछले वर्ष ही ध्वस्त हो चुके है. इस वर्ष इन दोनों स्परों को पूर्व की स्थिति में ही छोड. दिया गया है. वही स्पर संख्या दो इस वर्ष पहले से ही क्षतिग्रस्त हो गया है. स्पर संख्या एक तो उपेक्षित ही है. इस कारण यह बहने के कगार पर है. स्पर संख्या पांच और छह पूर्व से ही संवेदनशील है. स्पर संख्या पांच के डाउन रिबेटमेंट से तटबंध की दूरी मात्र 50-60 मीटर ही रह गयी है.
क्षेत्र के ग्रामीण इस बात को लेकर चिंतित हैं कि फिलहाल वर्तमान हालात में सरकार या विभाग की जरा भी शिथिलता या उदासीनता रही तो जल स्तर थोड़ा भी बढ.ने पर ही यहां गंगा रौद्र रूप दिखा सकती है. जिससे नवगछिया की स्थिति को भी उत्तराखंड जैसी स्थिति बनने से कोई रोक नहीं सकता | जिसके फलस्वरूप गोपालपुर , सैदपुर, करारी तिनटंगा, बुद्धूचक, बोचाही, नवटोलिया, डिमहा इत्यादि कई गाँव सहित गोपालपुर व इस्माइलपुर थाना, पीएचसी, प्रखण्ड कार्यालय इत्यादि के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो जाएगा |