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केदारनाथ में दो सौ राहतकर्मी फंसे

उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने एक बार फिर खतरे की स्थिति का उत्पन्न कर दिया है। केदारघाटी में हालात को सुधारने गए दो सौ राहतकर्मी खुद वहां फंस गए हैं। आसमान साफ होते ही उन्हें
निकालने के उपाय किए जाएंगे। गुरुवार रात से हो रही बारिश के कारण केदारघाटी में पैदल रास्ता बनाने के प्रयासों को झटका लगा है। पानी के तेज बहाव में कई स्थानों पर बनाए गए नए रास्ते बह गए हैं। हेलीकॉप्टर न उड़ पाने की वजह से सैकड़ों प्रभावित गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने का काम ठप हो गया है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा है कि हम प्रकृति से संघर्ष कर रहे हैं।
दैवीय आपदा की चपेट में आए रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों के ज्यादातर इलाकों में गुरुवार रात से ही रुक-रुककर बारिश हो रही है। शुक्रवार शाम से शुरू हुई मूसलाधार बारिश के बाद जिस प्रकार से अलकनंदा नदी उफनी है उससे आशंकाएं और बढ़ गई हैं। नदी के किनारे बसे लोगों को इलाका खाली करने के लिए कहा गया है। मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों में पिथौरागढ़, नैनीताल और अल्मोड़ा में भारी बारिश होने का अंदेशा जताया है। इससे आपदा प्रभावित पिथौरागढ़ की दशा और बिगड़ सकती है।
उत्तराखंड में खराब मौसम होने के कारण वायुसेना और निजी कंपनियों के हेलीकॉप्टर काम नहीं कर पा रहे हैं। शुक्रवार और शनिवार को हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री नहीं भेजी जा सकी। बादल चूंकि घाटियों में उतर आए हैं, इसलिए दृश्यता पर बुरा असर पड़ा है। ऐसे में घाटियों में बसे गांवों तक हेलीकॉप्टर से राहत पहुंचाना संभव नहीं हो पा रहा है। जानकारों के अनुसार यह स्थिति कमोबेश पूरे बरसात के मौसम में रहने वाली है। ऐसे में सड़क मार्ग से कट चुके गांवों में फंसी हजारों की आबादी का क्या होगा, यह प्रश्न मुंह बाए खड़ा है। जिन गांवों में सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है वहां पर प्रशासन ने मौसम खराब होने की चेतावनी मिलने के बाद राहत सामग्री पहुंचा दी थी। सड़क मार्ग से जुड़े गांवों को लेकर प्रशासन का दावा है कि वहां खाद्यान्न की कोई कमी नहीं है।
खराब मौसम के चलते केदारनाथ में अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के कार्य में भी बाधा आई है। हफ्ते भर में केवल 74 शवों का डीएनए नमूना लेकर अंतिम संस्कार किया जा सका है। 20 दिन पहले आई आपदा में मारे गए सैकड़ों लोगों के शव अभी खुले में पड़े हैं और उससे ज्यादा शव मलबे के नीचे दबे हुए हैं। बताया गया है कि आपदा के बाद पैदल रास्तों से भागे लोग जहां-तहां मरे। उनके शव वहीं पर पड़े हैं। अभी तक उन शवों को एकत्रित करने का कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है। बीस दिनों में इन शवों की दशा बहुत खराब हो चुकी है और वे अब उठाने लायक भी नहीं रह गए हैं।