माघी पूर्णिमा के पावन पर्व पर सोमवार को
स्नान दान करने को लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भागलपुर, बरारी से लेकर बटेश्वर स्थान तक गंगा
में डुबकी लगाई। यह अलग बात है कि गंगा के उत्तर वाहिनी होने के कारण बटेश्वर स्थान पर
बिहार का मिनी कुम्भ का नजारा था | जहां लोग एक दिन पहले से ही पहुँचना प्रारम्भ हो गए थे |
इधर भागलपुर और बरारी सहित अन्य घाटों पर सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। घाट पर सबसे ज्यादा महिलाओं की खचाखच भीड़। विक्रमशीला पुल के रास्ते नवगछिया, खगड़िया, मधेपुरा व सहरसा से भी हजारों वाहनों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाया । जहां घाट पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था थी।
सुबह दस बजे बाद भीड़ इतनी बढ़ गई कि कहलगांव, तिनटेंगा, गोपालपुर व बरारी से निकलने वाले हर रास्ते पर जाम की स्थिति बन गई थी। हर घाट पर उत्सव का सा माहौल था। स्नान दान कर गंगा मां की आरती पूजन की गई। साधु-सन्यासी व गरीबों को भोजन कराया गया। कई लोग घाट पर पितरों का तर्पण भी कर रहे थे। पितृ तर्पण के लिए माघी पूर्णिमा उत्तम दिन माना गया है। पितरों के निमित जलदान, अन्नदान, वस्त्रदान व भोजनदान करने से पितर को तृप्त कराने के लिए घाट पर भीड़ उमड़ी थी।
इस माघ पूर्णिमा पर चंद्रमा मघा नक्षत्र और सिंह राशि में स्थित होने के कारण इस साल खास संयोग बन रहा था। पुण्य कमाने, बुद्धि व लक्ष्मी पाने को ले श्रद्धा भाव से स्नान दान कर रहे थे। महिलाएं स्नान कर सफेद वस्त्र, भोजन, घी व कपास का दान कर रही थी। इस दिन कई लोगों ने घर में भगवान विष्णु की भी पूजा अर्चना की।
बिहार का मिनी कुम्भ का नजारा था | जहां लोग एक दिन पहले से ही पहुँचना प्रारम्भ हो गए थे |
इधर भागलपुर और बरारी सहित अन्य घाटों पर सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। घाट पर सबसे ज्यादा महिलाओं की खचाखच भीड़। विक्रमशीला पुल के रास्ते नवगछिया, खगड़िया, मधेपुरा व सहरसा से भी हजारों वाहनों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाया । जहां घाट पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था थी।
सुबह दस बजे बाद भीड़ इतनी बढ़ गई कि कहलगांव, तिनटेंगा, गोपालपुर व बरारी से निकलने वाले हर रास्ते पर जाम की स्थिति बन गई थी। हर घाट पर उत्सव का सा माहौल था। स्नान दान कर गंगा मां की आरती पूजन की गई। साधु-सन्यासी व गरीबों को भोजन कराया गया। कई लोग घाट पर पितरों का तर्पण भी कर रहे थे। पितृ तर्पण के लिए माघी पूर्णिमा उत्तम दिन माना गया है। पितरों के निमित जलदान, अन्नदान, वस्त्रदान व भोजनदान करने से पितर को तृप्त कराने के लिए घाट पर भीड़ उमड़ी थी।
इस माघ पूर्णिमा पर चंद्रमा मघा नक्षत्र और सिंह राशि में स्थित होने के कारण इस साल खास संयोग बन रहा था। पुण्य कमाने, बुद्धि व लक्ष्मी पाने को ले श्रद्धा भाव से स्नान दान कर रहे थे। महिलाएं स्नान कर सफेद वस्त्र, भोजन, घी व कपास का दान कर रही थी। इस दिन कई लोगों ने घर में भगवान विष्णु की भी पूजा अर्चना की।
