होलिका दहन की सुबह से ही गणगौर पूजा प्रारंभ हो गयी। यह पूजा राजस्थानी समाज की नव विवाहिता महिलाओं के द्वारा की जाने वाली विशेष पूजा है। जिसमे कुँवारी लडकियां भी भाग लेती है। इस दौरान मुख्य रूप से दूब (दुर्वा) द्वारा इस्सर (शिव) और गौरा (पार्वती) की पूजा की जाती है। जोसत्रहदिनोंतकचलतीहै।अंतिम दिन सभी सुहागिन महिलायें भी पूजा करती हैं। बाद में सामूहिक रूप से नदी अथवा तालाब में विसर्जन किया जाता है।