आज है वट सावित्री पूजा
सुहागिनों का पर्व न दूजा
मांगेगी पति की लंबी उमर
फिर छोड़ेगी न कोई कसर
आपको भी पड़ेगा आज पाला
नहीं होगा कोई गड़बड़ झाला
रोज आप ही खिलाते थे मेवा
आज आपकी करेगी पूरी सेवा
जब सत्यवान लकड़ियां लाने गया था
यमराज उसके प्राण साथ ले गया था
सती सावित्री ने भी ये व्रत किया था
इसके बल ही पति का प्राण बचाया था
अब ये भी कर रही हैं उसी की नकल
करती तो है सारे जतनों को पूरा अमल
सोचती हैं मैं भी हो जाऊंगी उतनी ही सफल
पर पति का प्राण लाने में रह जाती हैं विफल
राजेश कानोडिया, पत्रकार
नवगछिया, भागलपुर, (बिहार)
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