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किताबी कीड़ा न बनकर छात्र विश्व स्तरीय अध्ययन करें- कुलपति

हर श्रृंगार की टहनी से फले फुले आपका अरमान- स्वामी आगमानंद
नव-बिहार न्यूज नेटवर्क (NNN), नारायणपुर/ नवगछिया/ भागलपुर। सारे विश्व का भविष्य छात्रों पर ही निर्भर करता है। इसलिये छात्रों को सिर्फ किताबी कीड़ा न रहकर अपनी बुद्धि के बल पर विश्व स्तरीय अध्ययन करना चाहिये। तभी उनका
आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। आज के समय में पत्रकारिता और एनजीओ के क्षेत्र में प्रशिक्षण लेकर आगे बढ़ना ज्यादा फायदेमंद है।
उपरोक्त बातें तिलकामांझी भागलपुर विश्व विद्यालय के कुलपति नलिनी कांत झा ने नारायणपुर स्थित जेपी कॉलेज में कही। मौका था जयप्रकाश महाविद्यालय के संस्थापक स्व शिवधारी सिंह के स्मारक के शिलान्यास और कम्प्यूटरी करण का। इस मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति ने महाविद्यालय के छात्र छात्राओं से कहा कि छात्र दिवास्वप्न देखना छोड़कर प्लानिंग के अनुसार तैयारी करें तो आईएएस या आईपीएस ही नहीं कोई भी पद प्राप्त कर सकता है। यह भी सही है कि आगे बढ़ने में विघ्न बाधाएं आती रहेंगी। लेकिन दृढ़ निश्चय करने पर सफलता भी निश्चित मिलती है।
उन्होने छात्रों से यह भी कहा कि आत्महत्या की सोचना कायरता है। कभी भी निराशावादी नहीं बनें। अपने लक्ष्य पर डटे रहें तो सफलता आपके कदमों को चूमेगी। अच्छी शिक्षा रोजी रोटी के साधन के अलावा अच्छा मनुष्य भी बनाती है। तभी तो पशु और मनुष्य का अंतर स्पष्ट हो पाता है। मानवीय मूल्य ही मानव को महान बनाता है, चाहे वह किसी भी धर्म या सम्प्रदाय के क्यों न हो। इसके अलावा कुलपति ने छात्रों से यह भी कहा कि समाज के बारे में भी सोचना चाहिये। आपपर समाज का भी कर्ज है। उसे पूरा नहीं करने पर भी आपका जीवन व्यर्थ है।
इस कार्यक्रम को पूर्व कुलपति प्रो क्षेमेन्द्र कुमार सिंह, पूर्व डीन विज्ञान संकाय एवं रसायन शास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो ज्योतिंद्र चौधरी, इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो दयानंद राय, प्राचार्य टीएनबी कालेज प्रो आरपीसी वर्मा, विज्ञान निरीक्षक प्रो जयनंदन सिंह ने भी संबोधित किया। जिसका संचालन  जेपी कालेज के प्राचार्य प्रो डॉ विभांशु मंडल ने किया।
इस समारोह को संबोधित करते एवं छात्र छात्राओं को आशीर्वाद देते हुए परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने कहा कि मैं भी इस कॉलेज का छात्र रहा हूँ। आप सभी छात्र छात्रा जहां भी खोजेंगे मैं वहां मिल जाऊंगा। चाहे जल के बीच में या काँटों के ऊपर भी खड़ा खोजेंगे तो वहां भी मिलूंगा और आपका सहयोग करूँगा। उन्होंने आशीर्वचन के रूप में यह भी कहा कि
मंगलमय हो पंथ आपका यह है मेरा वरदान,
हर श्रृंगार की टहनी से फले फुले आपका अरमान।