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नवगछिया एनएच किनारे प्रखंड मुख्यालय में होता पीएचसी तो बच सकती थी दो युवाओं की जान


राजेश कानोडिया। 
यह बात सोलह आने सच प्रतीत होती है कि नवगछिया में यदि एनएच किनारे या प्रखंड मुख्यालय में पीएचसी होती तो सोमवार की सुबह गयी दो युवाओं की जान बच सकती थी । जिसे बस दुर्घटना स्थल से नवगछिया स्थित अनुमंडलीय अस्पताल लाने में काफी समय बीत गया। जिन्हें समुचित उपचार का समय नहीं मिल सका।
इन घायलों को अस्पताल तक लाने वाले पुलिस गश्ती दल के नायक अवर निरीक्षक अरविंद कुमार तथा नवगछिया थाना के अवर निरीक्षक रंजन कुमार को भी इस बात का अफसोस है कि हमें भी जाम की वजह से अनुमंडलीय अस्पताल तक लाने में लंबा समय लग गया। यदि एनएच पर या नवगछिया प्रखंड मुख्यालय में एक पीएचसी होता तो इन दोनों का बहुत जल्द उपचार प्रारम्भ हो सकता था। जिससे इनकी जान बचायी जा सकती थी।
बताते चलें कि आज से कई वर्षों पहले नवगछिया में एनएच किनारे अवस्थित प्रखंड मुख्यालय में नवगछिया पीएचसी वर्षों से कार्यरत था। जिसे एक साजिश के तहत स्थानांतरण कराकर नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल में स्थापित करा दिया गया। जो आज तक कार्यरत है। जो बिलकुल बेकार और निरर्थक साबित हो रहा है।
नवगछिया पीएचसी को वापस नवगछिया प्रखंड मुख्यालय में स्थापित कराने की कई बार मांग हो चुकी है। जिसके लिए प्रखंड प्रमुख से लेकर एसपी नवगछिया तक ने इस संबंध में कई बार आवाज उठायी है। कई राजनैतिक दलों ने भी इसकी मांग की है। यहाँ यक कि सत्ताधारी दल के भी कई लोग इस पीएचसी को वापस नवगछिया प्रखंड मुख्यालय में स्थापित कराने की मांग किए हैं, जो काफी आवश्यक है।