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दिल्ली की सरकार बनवाने में उपराज्यपाल के छूटेंगे पसीने


दिल्ली विधानसभा में किसी भी पार्टी को बहुमत ना मिल पाने के कारण पब्लिक से लेकर उपराज्यपाल हाउस तक उलझन में है। दिल्ली के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। पब्लिक ने ऐसा जनादेश दिया है कि ना बीजेपी और ना आम आदमी पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में है। चूंकि अब गेंद उपराज्यपाल के पाले में है। इसलिए उपराज्यपाल पूरी कोशिश करेंगे की दिल्ली में सरकार बन जाए, जब सरकार बनाने की संभावनाएं पूरी तरह से खत्म हो जाएंगी तब ही दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाएगा। 

अंतिम निर्णय एलजी ही लेंगे ऐसे में अब उपराज्यपाल को ही निर्णय लेना है कि सरकार कैसे बनेगी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार को सुबह से ही उपराज्यपाल भवन में माथा पच्ची चल रही है। चीफ सेक्रेटरी से लेकर दिल्ली सरकार के तमाम अधिकारी उपराज्यपाल भवन में सभी संभावनाओं पर विचार करने के लिए पहुंचे हुए थे। अगर ये सभी संभावनाएं फेल हो गई तो दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाना होगा। 

दिनभर रहा चर्चाओं का बाजार गर्म सोमवार को दिन भर सरकार बनाने की संभावनाओं लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित दोपहर में उपराज्यपाल नजीब जंग से मिलने पहुंची। हालांकि उन्होंने इस मुलाकात को औपचारिक बताया। लेकिन माना जा रहा है कि यह मुलाकात भी राजनैतिक परिस्थितियों के मद्देनजर थी। 

पहला मौका बीजेपी को दिल्ली विधानसभा के पूर्व सेक्रेटरी एस़ के़ शर्मा के मुताबिक भले ही किसी पार्टी को बहुमत ना मिला हो, लेकिन बीजेपी 32 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। इसलिए उपराज्यपाल सबसे पहले बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बुलाएंगे। इससे पहले चुनाव आयोग अपना नोटिफिकेशन जारी करेगा, जिसमें होगा कि ये सदस्य विधानसभा के सदस्य के रूप में जीते हैं। उपराज्यपाल बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए कुछ समय भी देंगे। 

फिर आएगा आप का नंबर उसके बाद अगर बीजेपी सरकार नहीं बना पाती है तो परंपरा के तौर पर आम आदमी पार्टी को बुलाएंगे। क्योंकि आम आदमी पार्टी 28 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। अगर दोनों ही पार्टियां सरकार नहीं बना पातीं। तब ही जाकर दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाएगा। 

अल्पमत वाली सरकार चलेगी! कुछ एक्सपर्ट का कहना है कि वैसे तो अल्पमत वाली सरकारें भी चलती हैं, लेकिन जब विधानसभा का सत्र होता है और बहुमत की मुश्किल होती है तो कुछ सदस्य सत्र से गायब हो जाते हैं। ऐसा कई बार हुआ है। अगर 70 में से 60 सदस्य ही मौजूद रहें तो बीजेपी सरकार चला सकती है। लेकिन बदले हुए माहौल में इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है। आम आदमी पार्टी ऐसा नहीं करेगी। 

तोड़फोड़ भी मुश्किल है दूसरी संभावना कांग्रेस के विधायक तोड़ने की भी हो सकती है। लेकिन दल बदल कानून के तहत कांग्रेस के 8 में से दो तिहाई यानी 5 सदस्य तोड़ने पड़ेंगे। यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस के जो भी नेता जीते हैं उनके टूटकर आने की कम ही संभावना है। 

दूर है विधायकी, मंत्री पद का लड्डू बीजेपी के जीते प्रत्याशियों को सता रही है कुर्सी न मिलने की चिंता प्रस, नई दिल्ली : पहले टिकट के लिए मारामारी फिर दिन-रात चुनाव प्रचार के बाद जिन्हें जीत मिली है, वे जीत का जश्न भी ठीक से नहीं मना पा रहे हैं। विधायक तो बन गए, पर कुर्सी दूर तक नजर नहीं आ रही है। बीजेपी के जो कैंडिडेट जीते हैं अब उन्हें यही चिंता सता रही है कि सरकार कैसे बनेगी। उन्हें दोबारा चुनाव का डर भी सता रहा है। हालांकि इस माहौल में वे लोग खुश हैं जिन्हें टिकट नहीं मिला था और उस सीट से पार्टी कैंडिडेट हार गया। उनकी उम्मीदें फिर से अंगड़ाइयां लेने लगी हैं। बीजेपी के एक एमएलए ने कहा कि मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल ने सभी एमएलए की मीटिंग बुलाई है और हम वहां भी अपनी बात रखेंगे। हम चाहते हैं कि कैसे भी कोई भी सरकार बनाए। 

कैसे बन सकती है सरकार? बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल ने कहा कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी तो बनकर उभरी है, लेकिन हम अभी बहुमत में नहीं हैं। हमारी किसी भी पार्टी से कोई बात नहीं हो रही है। हम न तो आम आदमी पार्टी को समर्थन दे रहे हैं और न ही ले रहे हैं। जब गोयल से पूछा कि क्या यह अभी का फैसला है या भविष्य का भी? तो उन्होंने कहा कि भविष्य किसने देखा है। एक सीनियर बीजेपी नेता ने कहा कि सारी पावर एलजी के हाथ में है। एलजी चाहें तो सिंगल लार्जेस्ट पार्टी से पूछ सकते हैं कि वह सरकार बनाना चाहते हैं या फिर सीधे ही सरकार बनाने का ऑफर कर सकते हैं। इस सूरत में सीधे शपथ दिला दी जाएगी और बाद में बहुमत साबित करना होगा। उन्होंने कहा कि बहुमत न मिलने पर भी मायनॉरिटी सरकार चल सकती है, अगर दूसरी पार्टी सरकार चलाने दे तो।