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बिहार में अनु. जाति मामले की सुनवाई को खुलेंगे पांच स्पेशल कोर्ट


अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष विद्यानंद विकल ने कहा है कि अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार रोकने के लिए बिहार सरकार नये-नये प्रावधान ला रही है। इस मामले में बिहार देश का मॉडल स्टेट बनने की ओर अग्रसर है। बिहार में अनुसूचित जाति के मामलों की सुनवाई के लिए पांच जिलों में स्पेशल कोर्ट का गठन किया जा रहा है। हाई कोर्ट ने इसके लिए हरी झंडी दे दी है। शीघ्र ही इसे अमली जामा पहनाया जाएगा। वहीं इस जाति वर्ग के लोगों में शिक्षा के विकास के लिए भी सरकार गंभीर है तथा हर प्रखंडों में नवोदय विद्यालय स्तर के आवासीय विद्यालय खोलने पर विचार कर रही है। अध्यक्ष श्री विकल स्थानीय सर्किट हाउस में शनिवार को पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।
आयोग के अध्यक्ष श्री विकल ने कहा है कि अनुसूचित जाति के लोगों को न्याय दिलाने के मामले में बिहार देश में मॉडल स्टेट बनने जा रहा है। सरकार के प्रस्ताव पर हाई कोर्ट ने सहमति जता दी है तथा शीघ्र ही ये कोर्ट अस्तित्व में आ जाएंगे। अनुसूचित जाति लोगों के लिए ये कोर्ट पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर एवं बेगूसराय में खोले जाएंगे। अध्यक्ष श्री विकल ने कहा है कि निचली अदालत में अनुसूचित जाति के लोगों के काफी मामले पेंडिंग पड़े हैं। स्पेशल कोर्ट के अस्तित्व में आने के बाद उन्हें जल्द न्याय मिल सकेंगे। वहीं श्री विकल ने कहा कि उक्त जाति की शिक्षा के प्रति भी सरकार गंभीर है। सरकार घटक उप योजना राशि का 60 फीसद शिक्षा पर खर्च करने पर विचार कर रही है। इस योजना मद में फिलहाल 56 हजार करोड़ रुपये जमा हैं। आयोग ने सरकार को राज्य के प्रत्येक प्रखंड में नवोदय विद्यालय स्तर के आवासीय विद्यालय खोलने का प्रस्ताव दिया था जिसको अमलीजामा पहनाने का काम सरकार ने शुरू कर दिया है। फिलहाल राज्य में 88 अनु.जाति छात्रों के विद्यालयों में यह सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा कॉलेज में पढ़ रहे मैट्रिक पास छात्रों को भी सुविधा देने का प्रस्ताव है। कॉलेज के 50 हजार छात्रों को मुफ्त भोजन देने की व्यवस्था सरकार शीघ्र करने जा रही है। वहीं उन्होंने कहा कि पूर्णिया जिले में उक्त जाति वर्ग के लोगों पर अत्याचार के काफी मामले कोर्ट में लंबित है जिसमें पीपी की उदासीनता की बात सामने आई है। इसलिए आयोग ने यहां स्पेशल पीपी बहाल करने का निर्णय लिया है। वहीं उन्होंने अनु. जाति मामले की मॉनिटरिंग कमेटी में एमपी, एमएलए को भी शामिल किए जाने पर बल दिया। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि आयोग और सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए कृत्संकल्पित है तथा इसमें बिहार एक मिसाल कायम करेगा।