दिल्ली गैंगरेप केस के चारों दोषियों को राजधानी की साकेत कोर्ट ने फांसी की सजा सुना दी है। देशभर में इस फैसले का स्वागत हो रहा है। घटना के दिन यानी कि पिछले साल 16 दिसंबर से ही दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग हो रही थी लेकिन एक तथ्य ये भी है कि इन दरिंदों को गैंगरेप करने के लिए नहीं, बल्कि निर्भया की हत्या के लिए फांसी की सजा सुनाई गई है।
जानी मानी वकील आभा सिंह के मुताबिक कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि धारा 302 के तहत दोषियों को सजा ए मौत दी जाती है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने धारा 376 यानी कि बलात्कार के लिए फांसी की सजा नहीं दी है, जो कि महत्वपूर्ण बात है। अगर बलात्कार के लिए फांसी की सजा दी जाती तो ज्यादा बड़ा संदेश जाता।
अब सवाल ये भी उठ रहे हैं कि यदि निर्भया मौत से लंबे संघर्ष के बाद किसी तरह बच जाती तो भी क्या इन दरिंदों को मौत की ही सजा दी जाती क्योंकि तब ये हत्या नहीं बल्कि हत्या की कोशिश यानी कि धारा 307 के तहत मुजरिम होते।