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पेट्रोल पर लागत से ज्यादा टैक्स

पेट्रोल पर लगाए गए करों की रकम इसकी वास्तविक उत्पादन लागत से ज्यादा बैठ रही है। इसकी वजह यह है कि पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) इस साल पांच बार बढ़ाया जा चुका है। राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल फिलहाल 60.70 रुपये प्रति लीटर है। इस खुदरा कीमत में केंद्र व राज्य के करों और शुल्कों की ही 31.20 रुपये हिस्सेदारी है। करों का यह भारी बोझ उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है।

पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा विनिमय दर और गैसोलीन की औसत लागत के हिसाब से रिफाइनरियों पर एक लीटर पेट्रोल तैयार करने में 24.75 रुपये खर्च होते हैं। कंपनी की मार्जिन और अन्य लागत जोड़ने पर पेट्रोल पंपों को एक लीटर पेट्रोल के लिए 27.24 रुपये चुकाना पड़ता है। इस पर केंद्र सरकार 19.06 रुपये उत्पाद शुल्क और डीलर 2.26 रुपये कमीशन वसूलते हैं। फिर राज्य सरकार की ओर से 12.14 रुपये वैट या सेल्स टैक्स लिया जाता है। इस तरह दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत बढ़कर 60.70 रुपये हो जाती है। यहां पेट्रोल पंपों पर डीजल 45.93 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है, लेकिन रिफाइनरी पर इसकी उत्पादन लागत महज 24.86 रुपये प्रति लीटर बैठ रही है