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बिना डाक्टर की सलाह के आँख में दवा या गुलाब जल डालना हो सकता है खतरनाक


बिना डाक्टर की सलाह पर मेडिकल दुकान से दवाई खरीद कर आंख में डालना या ग्रामीण झोला छाप डाक्टर की सलाह से आँख की दवा का उपयोग करना खतरनाक हो सकता है। इससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है। यह बातें विस्तार से किशनगंज के डाक्टर एससी सुमन ने विस्तार से बतायी। साथ ही इसके लिए जागरूकता के उपाय भी बताए। जिसके लिये उन्हें डॉ0 मंगतुराम अवार्ड के गोल्ड मैडल से नवाजा भी गया। इसी मौके पर आँख की रेटिना से संबन्धित रोगों पर पोस्ट ग्रेजुएट डॉ0 गुंजन भूदिरजा को मोमेंटों से सम्मानित किया गया। 
यह मौका था नवगछिया स्थित एक निजी होटल में आयोजित आठवाँ कोसी ओपथलमोलोजिकल सम्मेलन का। जिसका शुभारंभ नवगछिया के एसपी शेखर कुमार, कोसी ओपथलमोलोजिकल के अध्यक्ष डा. सीएम चौधरी, सचिव डा. सउद आलम, डॉ नागेंद्र प्रसाद, डॉ मिलिंद, डा. अतुल मिश्र, डा.बीएल चौधरी ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। 
इस मौके पर एसपी शेखर कुमार ने कहा कि डाक्टर भगवान के समान होते हैं। नेत्र चिकित्सकों की भूमिका तो और भी महान है। कारण आंखों की रोशनी को वहीं बरकरार रख सकते है। वहीं डा. सउद आलम ने कहा कि नौ वर्ष पूर्व कोसी ओथलमोलोजिकल की स्थापना हुई। इस संस्था से कई नेत्र चिकित्सक जुड़कर नेत्र रोगों की इलाज में अहम भूमिका निभा रहे है। उद्देश्य है कि लोगों को नेत्र रोगों के बारे में जागरुक किया जाए। 
डा.राजन के कहा कि यदि आंख लाल हो तो आंख में एंटिबायोटिक दवा डालने से पहले चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें। अपने मन से कोई दवा नहीं डालें। नवज्योति नेत्रलय धनबाद से आए चिकित्सक डा. बीए गुप्ता ने कहाकि आंख में बीमारी की वजह से सिरदर्द की शिकायत आम बात है। इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
इस आयोजन के आयोजक सचिव डा.बीएल चौधरी ने कहा कि प्राय: मां बच्चों की आंख में काजल लगा देती देती है। जो खतरनाक है। कारण हाथ के नाखून से बच्चे की आंख का रेटिना प्रभावित हो सकता है। कटिहार से आए डा. केएल अग्रवाल, डा अमित कुमार, नागेंद्र कुमार, बीएन गुप्ता, डा. केएस गुप्ता, डा. अतुल मिश्र, डा. रीना भगत आदि ने नेत्र रोग की समस्या और हल के बारे में विचार व्यक्त किए। इस पूरे आयोजन का संचालन डा. बादल कुमार चौधरी ने किया।