रेल सफर के दौरान अगर बच्चे बिछड़ जाएं, तो रेलवे न केवल उनकी देखभाल करेगा, बल्कि सही सलामत घर पहुंचाने की व्यवस्था भी करेगा। शीघ्र ही रेलवे स्टेशनों पर चिल्ड्रन असिस्टेंस सेंटर खुलेंगे। यहां सफर के दौरान परिवार से बिछड़े या घर से भागे बच्चों की देखभाल होगी। बच्चों की सेवा के लिए एक आया भी होगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने बाल अधिकार कानून के तहत चेयरमैन ऑफ रेलवे बोर्ड को ऐसे बच्चों की देखभाल करने का आदेश जारी किया है।
इस योजना पर काम शुरू हो गया है। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने सभी जोन के महाप्रबंधकों को निर्देश जारी कर दिया है। सेंटर के बेहतर संचालन के लिए मंडल स्तर पर चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी बनेगी।
सेंटर की जरूरत क्यों
नई दिल्ली की खुशबू जैन ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। उसमें कहा गया था कि दिल्ली के अलावा दूसरे शहरों के विभिन्न स्टेशनों पर अपनों से बिछुड़े बच्चों और या किसी कारण से घंटों स्टेशन पर फंसे परिवार में शामिल बच्चों की देखभाल के लिए विशेष कदम उठाया जाए। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे को कुछ निर्देश दिए। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी बना कर कमेटी के नोडल अधिकारियों के जिम्मे चिल्ड्रन असिस्टेंस सेंटर का प्रभार सौपा का निर्देश जारी किया।
ये मिलेंगीं सुविधाएं
बच्चों के लिए एक कमरा, खाने-पीने का सामान, खिलौने, टॉयलेट और प्राथमिक उपचार की सुविधा होगी। इस सेंटर से चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर, जीआरपी, आरपीएफ, लोकल चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के लोग संपर्क में रहेंगे। बच्चों की देखभाल के लिए एक आया रहेगी। कमेटी में जीआरपी के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ), आरपीएफ के इंस्पेक्टर, चीफ टिकट इंस्पेक्टर, टीटीई और सीनियर सेक्शन इंजीनियर (एसएसई/ वर्कस) शामिल होंगे।
