राजेश कानोडिया, नवगछिया। शारदीय नवरात्र को लेकर हर गांव और शहर में तैयारी आरंभ हो चुकी है। अभी से चारों ओर भक्ति की गंगा प्रवाहित होने लगी है। कई जगहों पर तो दुर्गा मंदिरों में प्रतिमा निर्माण का कार्य भी जारी है। मूर्तिकार प्रतिमा निर्माण में दिन-रात लगे हुए हैं। दुर्गा पूजा समितियों की बैठकें जारी है।
कोरोना काल में शारदीय नवरात्र को लेकर विशेष सावधानी बरती जाएगी। थर्मल स्क्रीनिग के बाद श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाएगा। कोरोना को देखते हुए पूजा समितियों की ओर से विशेष तैयारी की गई है। पूजा समिति की बजट में सैनिटाइजर भी शामिल है।
17 से शारदीय नवरात्र आरंभ
शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से आरंभ हो रहा है। श्रीशिवशक्ति योगपीठ नवगछिया के पीठाधीश्वर परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने बताया कि विश्वविद्यालय पंचांग दरभंगा के अनुसार 17 से शारदीय नवरात्र आरंभ है और 26 अक्टूबर को विजयादशमी हैं। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की आराधना के लिए नवरात्र सर्वोत्तम समय माना जाता है। इसमें शारदीय नवरात्र का सर्वाधिक महत्व है।
अश्व पर मां का आगमन, महिषा पर प्रस्थान
परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने बताया कि मां दुर्गा का आगमन अश्व (घोड़ा ) पर है। अश्व युद्ध का प्रतीक है। यह शासन और सत्ता के लिए अशुभ माना गया है। जबकि मां दुर्गा का प्रस्थान विजयादशमी सोमवार 26 अक्टूबर को है। मां दुर्गा महिषा (भैंसा ) पर सवार होकर लौटेगी। जिसका फल होता है, आमजन में शोक। वैसे कुछ पंचांग में विजयादशमी 25 अक्टूबर को बताया गया है। 25 अक्टूबर को दसवीं तिथि का प्रवेश एवं श्रवण नक्षत्र है। स्वामी ने कहा कि भक्त जन अपनी श्रद्धा, निष्ठा से मां की आराधना करेंगे।
परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने कहा है कि श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के संग शारदीय नवरात्र पर पूजा-अर्चना करें। इस दौरान कोरोना के नियमों का पालन करें। शारीरिक दूरी का ख्याल रखें। मास्क पहनें। मां दुर्गा कोरोना रूपी विपत्ति से लोगों को उबार लेंगी। मंदिरों में भीड़-भाड़ न लगाएं। पूजा समितियों के नियमों का शत-प्रतिशत पालन करें।