नवगछिया व्यवहार न्यायालय स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम चंद्रमा सिंह की अदालत ने गुरुवार को हत्या के आरोपी जनार्दन यादव को उम्र कैद की
सजा सुनायी है | जिसने 6 अक्तूबर 2007 की रात अपने ही साढ़ू विलक्षण यादव की गड़ासा से हत्या कर दी थी |
नवगछिया व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पंचम) चंद्रमा सिंह की अदालत ने गुरुवार को खगड.िया जिले के पसरहा थाना क्षेत्र निवासी जनार्दन यादव को उम्र कैद की सजा सुनायी. मुजरिम पर दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया. जुर्माना की राशि अदा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. वर्ष 2007 के छह अक्तूबर की रात करीब दो बजे बिहपुर थाना क्षेत्र के अरसंडीह निवासी विलक्षण यादव अपने दरवाजे पर सोया हुआ था. उसकी पत्नी सुनैना देवी उसका पैर दबा रही थी. इसी बीच जनार्दन यादव ने कुट्टी काटने वाला गंड.ासा लेकर आया और विलक्षण यादव की गला काट कर हत्या कर दी. पहले विलक्षण यादव की पत्नी सुनैना देवी ने पुलिस के समक्ष बयान दिया कि गांव के ही अशोक यादव ने उसके पति की हत्या की है. लेकिन, बाद में अपने बयान से मुकरते हुए उसने अपनी बहन मीना देवी के पति खगड.िया जिले के पसरहा निवासी जनार्दन यादव पर पति की हत्या का आरोप लगाया. हत्या का कारण बताते हुए उसने बयान दिया था कि मीना देवी का अवैध संबध उसके पति विलक्षण यादव से था. जनार्दन यादव ने दोनों को संदिग्ध अवस्था में देख लिया था. पुलिस ने जनार्दन मंडल की निशानदेही पर ही छोटी रेलवे लाइन के पास खाई से हत्या में प्रयुक्त गंड.ासा बरामद किया था. पुलिस ने अनुसंधान के बाद इस मामले में सिर्फ जनार्दन यादव के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय को सर्मपित किया. अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने अशोक यादव के विरुध संज्ञान लेते हुए मामले को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम चन्द्रमा सिंह की अदालत में स्थानांतरित कर दिया, जहां सात गवाहों की सुनवाई के बाद अशोक यादव को बरी कर दिया गया और जनार्दन यादव को भारतीय दंड विधान संहिता की धारा 302 के तहत दोषी पाते हुए उम्र कैद की सजा दी. इस मामले में सरकार की ओर से अभियोजन संचालन अपर लोक अभियोजक परमानंद साह ने बहस की.