पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा ने उच्चतम न्यायालय में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निर्वाचन को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा से समर्थन प्राप्त संगमा चुनाव में प्रणब मुखर्जी से हार गए थे। गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भाजपा ने यह आपत्ति दर्ज कराई थी कि नामांकन के समय प्रणब मुखर्जी भारतीय सांख्यिकी संस्थान के अध्यक्ष जैसे लाभ के पद पर थे, लिहाजा उनका पर्चा खारिज होना चाहिए।संगमा ने यह भी आरोप लगाया था कि मुखर्जी ने इस पद से इस्तीफे के लिए जो पत्र लिखा था, उस पर उनके जाली हस्ताक्षर थे। निर्वाचन अधिकारी ने भाजपा और अन्य दलों के इन आरोपों को खारिज कर दिया था। बाद में यह मामला निर्वाचन आयोग भी पहुंचा था, लेकिन वहां भी कहा गया कि अगर कोई शिकायत हो तो निर्वाचन के पश्चात सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करना ही उचित होगा। वहीं इस मामले से भाजपा को समर्थन देने वाली भाजपा ने भी पल्ला झाड़ ने लिया है। भाजपा का कहना है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने का निर्णय संगमा का व्यक्तिगत फैसला है। इससे भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है।याचिका दायर होने के बाद यह दूसरा मामला है, जब किसी राष्ट्रपति को अदालती कार्रवाई का सामना करना होगा। इसके पूर्व १९६९ में तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरि को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा था। नीलम संजीव रेड्डी ने गिरि के खिलाफ चुनाव याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति भवन जाकर गिरि के बयान को दर्ज करने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन वीवी गिरि अदालत आए। कोर्ट ने उनके लिए विशेष व्यवस्था की। हांलाकि शीर्ष अदालत ने यह चुनाव याचिका खारिज कर दी थी।