दिल्ली गैंगरेप केस का छठा आरोपी भी पकडा गया है. अक्षय ठाकुर नाम का ये आरोपी बिहार के औरंगाबाद से पकडा गया है.
देश की राजधानी दिल्ली में चलती बस में छात्रा से गैंग रेप के मामले में देश का गुस्‍सा फूट पड़ा है. राष्ट्रपति भवन के बाहर आज महिलाओं और छात्राओं ने जबर्दस्त प्रद्रशन किया.

राष्ट्रपति भवन के बाहर बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच महिलाओं ने इंसाफ की आवाज बुलंद की. सुरक्षाकर्मियों ने महिलाओं को रोकने की कोशिश की, लेकिन विरोध कम नहीं हुआ.
छात्राओं और महिलाओं ने बेहद सुरक्षा वाले नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक के रास्ते को जाम कर दिया.
प्रदर्शनकारियों में इचना ज्यादा गुस्सा था कि नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक के रास्ते में इन्होंने कई वीआईपी लोगों का गाड़ियां रोक लीं.
हाल के दिनों में ऐसा पहली बार हुआ है जब राष्‍ट्रपति भवन के बाहर इस तरह का विरोध प्रदर्शन हुआ हो. प्रदर्शनकारी राष्‍ट्रपति भवन के गेट तक पहुंच गए थे.
सभी आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली गैंगरेप के सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. चार तो पहले ही पुलिस की गिरफ्त में आ चुके थे. आज दो आरोपियों को और गिरफ्तार किया गया है.
बिहार के औरंगाबाद से अक्षय ठाकुर नाम के आरोपी को पुलिस ने अपनी गिरफ्त में लिया है.
इससे पहले पुलिस ने आज एक और आरोपी को भी गिरफ्तार किया. दिल्ली पुलिस अभी उसकी उम्र की जांच कर रही है क्योंकि आरोपी ने नाबालिग होने का दावा किया है. अगर वो नाबालिग हुआ तो पुलिस उसकी जानकारी नहीं देगी.
गंभीर है पीडित की हालत
इस बीच सफदरजंग अस्पताल में भर्ती पीड़ित लड़की की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है. आज कुछ देर के लिए उसे वेंटिलेटर से हटाया गया था लेकिन बाद में फिर वेंटिलेटर पर रख दिया गया. डॉक्टरों के मुताबिक पीड़ित का प्लेटलेट काउंट गिरने से चिंता बनी हुई है.

दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म की शिकार 23 वर्षीय युवती की हालत स्थिर है, लेकिन अगले कुछ दिनों में उसके शरीर में संक्रमण फैलने का खतरा है. एक चिकित्सक ने यहां शुक्रवार को यह जानकारी दी. उन्होंने हालांकि कहा कि संक्रमण अभी फैला नहीं है.
सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक बी.डी. नाथानी ने यहां संवाददाताओं से कहा, "उसके श्वेत रुधिर कणिकाओं (डब्ल्यूबीसी) का अनुपात 1,500 है, जिसका मतलब यह है कि उसकी रोगप्रतिरोधक क्षमता कमजोर है. ये सेप्सिस के शुरुआती संकेत हैं."
उन्होंने बताया कि संक्रमण के कारण पूरे शरीर में सूजन फैलने की अवस्था को सेप्सिस कहते हैं और इसमें मौत की भी सम्भावना रहती है.
उन्होंने कहा, "संक्रमण पर काबू पाने के लिए हम मरीज को एंटीबायोटिक्स दे रहे हैं. हम उनके कक्ष में अधिकतम स्वच्छता भी बरत रहे हैं. मैं सरकारी लोगों से अनुरोध करता हूं कि भुक्तभोगी के कक्ष में न जाने की कोशिश करें, ताकि स्वच्छता का स्तर बरकरार रहे."