कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करवाचौथ का व्रत रख भगवान से प्रार्थना करेंगी। शुक्रवार को करवाचौथ का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। इस व्रत की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। जहां महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखेंगी, वहीं कहीं-कहीं पुरुष भी
अपनी पत्नी की लंबी आयु के लिए व्रत रख उनकी लंबी आयु की कामना करेंगे।
शहर में त्योहार की तैयारियों को लेकर महिलाएं अपनी हाथों व पैरों पर विभिन्न प्रकार के आकर्षक डिजाइनों की महेंदी रचा रही हैं। महिलाओं ने नए कपड़ों की भी खरीदारी की है। वृद्ध महिला का कहना है कि वे भी अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखेंगी। उनका कहना है कि हर महिला का सपना होता है कि वे सदा सुहागिन रहें और परिवार में हर समय सुख समृद्धि रहे। जमाना बड़ी तेजी से बदल रहा है। समय के साथ साथ तीज-त्योहारों में भी बदलाव आता जा रहा है। हमारी प्राचीन सभ्यता व संस्कृति धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। 
करवा चौथ का त्योहार ऐसी है जिसके प्रति लोगों में उत्साह अधिक बढ़ता जा रहा है। महिलाओं के साथ-साथ पुरूष वर्ग भी इस त्योहार को अहमियत देने लगा है। जैसे-जैसे जमाना बदलता जा रहा है उसी प्रकार युवा वर्ग में करवाचौथ के प्रति उत्साह दिखाई देने लगा है। प्राचीनकाल से ही महिलाएं अलसुबह उठकर साफ सफाई करके मिट्टी की कमोई में पानी भरती हैं और एक छोटी हांडी में अनाज भरती हैं। उस पर फल व वस्त्र आदि रख कर पूजा  के बाद घर में बुजुर्ग महिलाओं को उसे भेंट करती हैं। सज-धज कर करवाचौथ की कहानियां सुनने के बाद बुजुर्गो का आशीर्वाद लेती हैं और रात को चांद को अ‌र्घ्य देने के बाद महिलाएं अपने पति का चेहरा देखकर व्रत खोलने के बाद ही अन्न ग्रहण करती हैं। जो पुरूष करवाचौथ का व्रत करते हैं वह भी अपनी पत्‍‌नी का चेहरा देखकर ही व्रत खोलते हैं। पूजा अर्चना करने के बाद ही वे एक-दूसरे के हाथ से अन्न का निवाला ग्रहण करते हैं।

कई कथाएं है प्रचलित
इस व्रत पर्व को लेकर कई कथाएं है। प्रचलित कथाओं में एक में कहा जाता है कि सात भाई और एक बहन होती हैं। बहन व्रत रखती है और इकलौती बहन को भूखे-प्यासे देख भाइयों को कष्ट होता है और वे चलनी में दीपक रख दूर जाकर पेड़ पर चढ़कर कृत्रिम चांद का दर्शन करा देते हैं। कृत्रिम चन्द्र का दर्शन और अ‌र्घ्य दान के बाद बहन पारण तो कर लेती है लेकिन उसके बाद उसका पति काफी बीमार हो जाता है। इस गलती का अहसास होने पर अगले बरस फिर जब वह विधि-विधान से व्रत व पूजन करती है तो उसका पति रोग मुक्त हो जाता है।
उसी परम्परा के तहत शुक्रवार को महिलाएं हमेशा की तरह से व्रत रखेंगी। रात्रि में पूजन और चन्द्र दर्शन के बाद पारण करेंगी। परंपरा यह भी है कि चन्द्र दर्शन के बाद पति का चेहरा चलनी से देखने के बाद पारण किया जाता है तो वहीं पति के हाथ से दिया जल ग्रहण किया जाता है।
बाजारों में रही रौनक
करवाचौथ के त्योहार को देखते हुए बाजारों में भी दिनभर रौनक रही। महिलाओं ने जहां व्रत को लेकर श्रृंगार के सामान की खरीदारी की, वहीं व्रत के दौरान पूजा की सामग्री की भी खरीदारी की। दुकानों पर महिलाओं की सामन खरीदने के लिए भीड़ लगी रही। शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्र से भी काफी संख्या में महिलाएं व युवतियां सामान की खरीददारी करने के लिए आई हुई थी। वहीं दूसरी ओर पूजा के लिए मिट्टी की कमोई की भी खरीदारी की।
ब्यूटी पार्लरों पर करना पड़ा इंतजार
करवाचौथ के त्योहार पर ब्यूटी पार्लरों पर भी बृहस्पतिवार को महिलाओं की अच्छी खासी भीड़ लगी रही। महिलाओं को अपनी बारी आने के लिए काफ समय तक इंतजार भी करना पड़ा। ब्यूटी पार्लर संचालकों ने भी जमकर चांदी कूटी। महिलाओं ने जहां अपने चेहरे का मेकअप करवाया वहीं हाथ व पैरों पर महेंदी भी रचाई।